एकादशी व्रत की कथा, यहां से पढ़ें आज की एकादशी व्रत की कहानी, जानें आज कौन सी एकादशी है?

Papankusha Ekadashi Vrat Katha In Hindi (पापांकुशा एकादशी व्रत संपूर्ण कथा हिंदी में): आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन पापाकुंशा एकादशी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को यमराज के दर्शन नहीं करने पड़ते हैं। आज एकादशी का दिन है और आज के दिन व्रत कथा जरूर पढ़ी जाती है। यहां से आप एकादशी की व्रथ कथा देख सकते हैं।

Papankusha Ekadashi Vrat Katha In Hindi (पापांकुशा एकादशी व्रत संपूर्ण कथा हिंदी में): भगवान् श्रीकृष्ण बोले- राजन्, आश्विनके शुक्रपक्षमें जो एकादशी होती है। वह 'पापाकुंशा' के नाम से विख्यात है। वह सब पापोंको हरनेवाली तथा उत्तम है। उस दिन सम्पूर्ण मनोरथ की प्राप्ति के लिये मनुष्यों को स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाले पद्मनाभसंज्ञक मुझ वासुदेवका पूजन करना चाहिये। जितेन्द्रिय मुनि चिरकालतक कठोर तपस्या करके जिस फलको प्राप्त करता है, वह उस दिन भगवान् गरुड़ध्वजको प्रणाम करनेसे ही मिल जाता है। पृथ्वीपर जितने तीर्थ और पवित्र देवालय हैं, उन सबके सेवनका फल भगवान् विष्णुके नामकीर्तनमात्रसे मनुष्य प्राप्त कर लेता है। जो शार्ङ्गधनुष धारण करनेवाले सर्वव्यापक भगवान् जनार्दनकी शरणमें जाते हैं, उन्हें कभी यमलोककी यातना नहीं भोगनी पड़ती।

एकादशी व्रत की कथा (pic credit: canva)

यदि अन्य कार्यके प्रसङ्गसे भी मनुष्य एकमात्र एकादशीको उपवास करता है तो उसे कभी नम-वासना नहीं प्राप्त होती। जो पुरुष विष्णुभक्त होकर भगवान् शिवको निन्द्य करता है, वह भगवान् विष्णुके लोक में स्थान नहीं पाता, उसे निश्चय ही नरकमे गिरना पड़ता है। इसी प्रकार यदि कोई शैव या पाशुपत होकर भगवान् विष्णुकी निन्दा करता है। तो वह घोर रौरव नरकमें डालकर तबतक पकाया जाता है, जबतक कि चौदह इन्द्रोंकी आयु पूरी नहीं हो जाती । यह एकादशी स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाली, शरीरको नीरोग बनानेवाली तथा सुन्दर स्त्री, धन एवं मित्र देनेवाली है। राजन् ! एकादशीको दिनमें उपवास और यत्रिमें जागरण करने से अनायास ही विष्णु धाम की प्राप्ति हो जाती है।

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