28 October Ka Panchang: 28 अक्टूबर 2025, मंगलवार का दिन, हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से शुरू होगा, जो सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी। यह दिन छठ पर्व के उदित सूर्य की उपासना का विशेष अवसर है, जो आध्यात्मिक और भौतिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
28 अक्टूबर का पंचांग
आज सूर्योदय के समय आप कितने बजे सूर्य अर्घ्य देंगे, इसको आज के पंचांग से जान सकते हैं। आज नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा दोपहर 3 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, फिर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रभावी होगा। योग में सुकर्मा सुबह 7 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, इसके बाद धृति योग शुरू होगा। करण में तैतिल सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक, फिर गर करण शाम 8 बजकर 45 मिनट तक, इसके बाद वणिज करण रहेगा। पंचांग के माध्यम से आप दिन के शुभ और अशुभ काल का पता लगा सकते हैं।
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
सूर्य आज सुबह 6:30 बजे उदय होगा और शाम 5:39 बजे अस्त होगा। चंद्रमा दोपहर 12:22 बजे उदय होगा और रात 10:41 बजे अस्त होगा। दिन की अवधि 11 घंटे 8 मिनट 52 सेकंड रहेगी, जबकि रात की अवधि 12 घंटे 51 मिनट 49 सेकंड होगी। मध्याह्न दोपहर 12:05 बजे होगा।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण
आज की तिथि शुक्ल षष्ठी सुबह 7:59 बजे तक रहेगी, इसके बाद शुक्ल सप्तमी शुरू होगी। नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा दोपहर 3:45 बजे तक रहेगा, फिर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रभावी होगा। पूर्वाषाढ़ा का तीसरा पाद सुबह 9:13 बजे तक, चौथा पाद दोपहर 3:45 बजे तक, उत्तराषाढ़ा का पहला पाद रात 10:14 बजे तक और दूसरा पाद सुबह 4:42 बजे, 29 अक्टूबर तक रहेगा। योग में सुकर्मा सुबह 7:51 बजे तक रहेगा, फिर धृति योग शुरू होगा। करण में तैतिल सुबह 7:59 बजे तक, गर करण शाम 8:45 बजे तक और इसके बाद वणिज करण दिन की समाप्ति तक रहेगा।
चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर
विक्रम संवत 2082 कालयुक्त, शक संवत 1947 विश्वावसु और गुजराती संवत 2082 पिंगल है। बृहस्पति संवत्सर कालयुक्त 25 अप्रैल 2025 को दोपहर 3:07 बजे तक रहेगा, फिर सिद्धार्थी शुरू होगा। चंद्र मास कार्तिक है, जो पूर्णिमांत और अमांत दोनों में गणना होता है। प्रविष्टे/गते 12 है।
राशि और नक्षत्र
चंद्र राशि धनु में रात 10:14 बजे तक रहेगी, फिर मकर में प्रवेश करेगी। सूर्य राशि तुला में है और सूर्य स्वाती नक्षत्र के दूसरे पाद में है। पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र सकारात्मक ऊर्जा और कार्यों में सफलता देंगे।
ऋतु और अयन
ऋतु शरद (वैदिक) और हेमंत (द्रिक) है। अयन दक्षिणायन है। मौसम सुखद रहेगा, लेकिन रात में ठंडक बढ़ सकती है।
28 अक्टूबर का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:48 बजे से 5:39 बजे तक, ध्यान और पूजा के लिए उत्तम।
- प्रातः संध्या: सुबह 5:13 बजे से 6:30 बजे तक, स्पिरिचुअल कार्यों के लिए शुभ।
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक, महत्वपूर्ण कार्यों के लिए फेवरेबल।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:56 बजे से 2:41 बजे तक, नए काम शुरू करने के लिए अच्छा।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:39 बजे से 6:05 बजे तक, पूजा और फैमिली टाइम के लिए शुभ।
- सायाह्न संध्या: शाम 5:39 बजे से 6:56 बजे तक, भक्ति कार्यों के लिए बेस्ट।
- अमृत काल: सुबह 10:29 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
- निशिता मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 12:31 बजे, 29 अक्टूबर तक, रात के पूजा के लिए अच्छा।
- त्रिपुष्कर योग: दोपहर 3:45 बजे से सुबह 6:31 बजे, 29 अक्टूबर तक, कार्यों में सफलता।
- रवि योग: सुबह 6:30 बजे से दोपहर 3:45 बजे तक, सूर्य से जुड़े कामों के लिए शुभ।
28 अक्टूबर का अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 2:52 बजे से शाम 4:15 बजे तक, बड़े फैसले या नए काम शुरू करने से बचें।
- यमगण्ड: सुबह 9:17 बजे से 10:41 बजे तक, जोखिम भरे कामों से बचें।
- गुलिक काल: दोपहर 12:05 बजे से 1:28 बजे तक, सावधानी बरतें।
- विडाल योग: सुबह 6:30 बजे से दोपहर 3:45 बजे तक, अशुभ माना जाता है।
- आडल योग: दोपहर 3:45 बजे से सुबह 6:31 बजे, 29 अक्टूबर तक, सावधानी रखें।
- वर्ज्य: रात 12:20 बजे, 29 अक्टूबर से 2:03 बजे, 29 अक्टूबर तक, शुभ कार्यों से बचें।
- दुर्मुहूर्त: सुबह 8:44 बजे से 9:29 बजे तक और दोपहर 2:41 बजे से 3:26 बजे तक, काम शुरू करने से बचें।
- बाण: मृत्यु दोपहर 3:05 बजे तक, फिर अग्नि पूर्ण रात तक, अशुभ प्रभाव।
आनंदादि और तमिल योग
आनंदादि योग में मित्र दोपहर 3:45 बजे तक रहेगा, फिर मानस शुरू होगा, दोनों शुभ हैं। तमिल योग में अमृत दोपहर 3:45 बजे तक रहेगा, फिर अमृत ही रहेगा। जीवनम में अर्ध जीवन और नेत्रम में एक नेत्र रहेगा।
निवास और शूल
होमाहुति बुध को दोपहर 3:45 बजे तक, फिर शुक्र को दी जाएगी। दिशा शूल उत्तर दिशा में है, इस दिशा में यात्रा से बचें। चंद्र वास पूर्व में रात 10:14 बजे तक, फिर दक्षिण में। अग्निवास पाताल सुबह 7:59 बजे तक, फिर पृथ्वी पर। राहु वास पश्चिम में रहेगा। शिववास नंदी पर सुबह 7:59 बजे तक, फिर भोजन में। कुंभ चक्र दक्षिण में है, जो शुभ है।
