आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang) 16 May 2026 : 16 मई 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि है। इसी दिन वट सावित्री व्रत और शनि जयंती मनाई जा रही है। साथ ही भरणी नक्षत्र और सौभाग्य योग का प्रभाव इस दिन को बेहद खास बना रहा है। भगवान शनिदेव की पूजा, वट वृक्ष की पूजा, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं आज का पूरा पंचांग, शुभ-अशुभ समय और ग्रहों की स्थिति क्या है।
16 मई 2026 का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय (Sunrise and Moonrise)
आज सूर्य का उदय सुबह 05:30 बजे और सूर्यास्त शाम 07:05 बजे होगा। आज चन्द्रोदय नहीं होगा। चन्द्रास्त शाम 06:44 बजे होगा।
तिथि, नक्षत्र और योग (Tithi, Nakshatra and Yog)
आज कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 17 मई को रात 01:30 बजे तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। नक्षत्र की बात करें तो भरणी नक्षत्र शाम 05:30 बजे तक रहेगा, इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र शुरू होगा। योग में सौभाग्य योग सुबह 10:26 बजे तक रहेगा, इसके बाद शोभन योग प्रारंभ होगा।
करण (Karan)
चतुष्पाद करण दोपहर 03:22 बजे तक रहेगा। इसके बाद नाग करण 17 मई को रात 01:30 बजे तक रहेगा। फिर किंस्तुघ्न करण शुरू होगा।
वार एवं पक्ष (Day and Paksha)
आज शनिवार है और कृष्ण पक्ष चल रहा है।
चन्द्र मास, सम्वत (Lunar Month and Samvat)
आज विक्रम सम्वत 2083 सिद्धार्थी, शक सम्वत 1948 पराभव और गुजराती सम्वत 2082 पिंगल है। चन्द्र मास ज्येष्ठ (पूर्णिमांत) और वैशाख (अमांत) है। प्रविष्टे/गते 2 है।
राशि तथा ग्रह स्थिति (Rashi and Planetary Positions)
आज चंद्रमा रात 10:46 बजे तक मेष राशि में रहेंगे, इसके बाद वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य वृषभ राशि में स्थित हैं। सूर्य कृत्तिका नक्षत्र में विराजमान हैं। अन्य ग्रहों की स्थिति सामान्य बनी हुई है।
ऋतु तथा अयन (Season and Ayana)
द्रिक ऋतु के अनुसार ग्रीष्म ऋतु चल रही है, जबकि वैदिक ऋतु वसंत है। उत्तरायण का प्रभाव बना हुआ है। दिनमान 13 घंटे 35 मिनट 29 सेकंड और रात्रिमान 10 घंटे 23 मिनट 57 सेकंड रहेगा। मध्याह्न 12:18 बजे होगा।
16 मई का शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:07 बजे से 04:48 बजे तक
प्रातः सन्ध्या: सुबह 04:27 बजे से 05:30 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से 12:45 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 बजे से 03:28 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:04 बजे से 07:25 बजे तक
सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:05 बजे से 08:08 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 01:15 बजे से 02:40 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:57 बजे से 12:38 बजे (17 मई) तक
वट सावित्री व्रत पूजा का शुभ समय
वट सावित्री व्रत की पूजा के लिए सुबह से दोपहर तक का समय शुभ माना जा रहा है। विशेष रूप से अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त में पूजा करना फलदायी रहेगा।
शनि जयंती पूजा का शुभ समय
शनिदेव की पूजा, तेल अर्पण, शनि मंत्र जाप और दान के लिए सुबह 07:12 बजे से 10:36 बजे के बीच का समय शुभ माना जा रहा है।
16 मई का अशुभ मुहूर्त (Inauspicious Timings)
राहुकाल: सुबह 08:54 बजे से 10:36 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 02:00 बजे से 03:42 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 05:30 बजे से 07:12 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 05:30 बजे से 06:24 बजे तक
वर्ज्य: 17 मई को सुबह 04:01 बजे से 05:25 बजे तक
आडल योग: सुबह 05:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक
बाण: मृत्यु बाण सुबह 07:21 बजे से पूरी रात तक रहेगा।
आनन्दादि एवं तमिल योग (Anandadi and Tamil Yog)
आनन्दादि योग में ध्वांक्ष योग शाम 05:30 बजे तक रहेगा, जिसे अशुभ माना जाता है। इसके बाद केतु/ध्वज योग रहेगा, जिसे शुभ माना जाता है। तमिल योग में शाम 05:30 बजे तक मरण योग रहेगा, इसके बाद सिद्ध योग शुरू होगा।
निवास और शूल (Nivas and Shool)
आज दिशा शूल पूर्व दिशा में रहेगा। चन्द्र वास रात 10:46 बजे तक पूर्व दिशा में रहेगा, इसके बाद दक्षिण दिशा में रहेगा। राहु वास पूर्व दिशा में रहेगा। अग्निवास 17 मई रात 01:30 बजे तक पाताल में रहेगा, इसके बाद आकाश में माना जाएगा। शिववास 17 मई रात 01:30 बजे तक गौरी के साथ रहेगा, इसके बाद श्मशान में माना जाएगा। कुम्भ चक्र शाम 05:30 बजे तक कण्ठ में रहेगा, जिसे शुभ माना जाता है। इसके बाद मुख में रहेगा।
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने इसी व्रत के प्रभाव से अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे।
शनि जयंती का महत्व
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनिदेव का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन शनिदेव की पूजा, शनि मंत्रों का जाप, काले तिल, तेल और वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी पंचांग पर आधारित है और सामान्य मान्यताओं के अनुसार दी गई है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
