14 Yam Kaun se hote hain: नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली पर घरों में दीप जलाने की परंपरा है। इस दिन 14 दीये जलाने का भी विशेष महत्व माना जाता है। इनमें एक दीपक यमराज के नाम से जलाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धार्मिक मान्यताओं में यमराज के 14 नाम बताए गए हैं? आखिर ये 14 यम कौन हैं? क्या ये सभी अलग-अलग देवता हैं या यमराज के ही अलग-अलग स्वरूप हैं? और नरक चतुर्दशी पर इनके नाम से दीपदान करने के पीछे क्या मान्यता है?
यम के नाम के 14 दीये क्यों जलाए जाते हैं, नरक चतुर्दशी पर क्यों है ये परंपरा (AI Image)
दरअसल, यमराज के इन 14 नामों का संबंध जीवन, मृत्यु, समय और कर्मों के हिसाब से मिलने वाले फल से है। नरक चतुर्दशी पर इनका स्मरण करना और दीपदान करना मृत्यु के भय से मुक्ति, अकाल मृत्यु से रक्षा और परिवार की मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है।
यमराज के 14 नाम कौन से हैं
पंडित रमाशंकर उपाध्याय के अनुसार, यमराज को केवल मृत्यु का देवता नहीं माना जाता, बल्कि वे मनुष्य के कर्मों का हिसाब रखने वाले और धर्म के अनुसार न्याय करने वाले देवता भी हैं। उनके 14 नाम उनके अलग-अलग गुणों, कार्यों और स्वरूपों को दर्शाते हैं।
धार्मिक परंपरा में यमराज के ये 14 नाम बताए गए हैं:
1. यम – जीवन और मृत्यु के विधान का पालन कराने वाले।
2. धर्मराज – मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों के आधार पर न्याय करने वाले।
3. मृत्यु – जीवन का अंत करने वाले देवता।
4. अन्तक – जीवन की अंतिम सीमा निर्धारित करने वाले।
5. वैवस्वत – सूर्यदेव विवस्वान के पुत्र।
6. काल – समय और मृत्यु के अधिपति।
7. सर्वभूतक्षय – समस्त प्राणियों के जीवन का अंत करने की शक्ति रखने वाले।
8. औदुम्बर – यमराज का एक विशेष नाम और स्वरूप।
9. दध्न – यमराज के नामों में शामिल एक स्वरूप।
10. नील – यमराज का एक नाम।
11. परमेष्ठी – सर्वोच्च पद पर विराजमान देवता।
12. वृकोदर – यमराज का एक विशेष नाम।
13. चित्र – कर्मों के लेखे-जोखे से जुड़ा नाम।
14. चित्रगुप्त – मनुष्यों के कर्मों का लेखा रखने वाले देवता।
इन नामों का उल्लेख नरक चतुर्दशी की पूजा विधि में भी मिलता है। हालांकि, इन्हें 14 अलग-अलग यमराज नहीं समझना चाहिए। ये एक ही देवता के 14 नाम हैं।
नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाए जाते हैं 14 दीये
नरक चतुर्दशी पर 14 दीये जलाने की परंपरा का संबंध यमराज और मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना से है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। दीपक का प्रकाश यहां जीवन, सकारात्मकता और अंधकार से मुक्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि यमराज को दीप अर्पित करके व्यक्ति अपने और अपने परिवार के लिए सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना करता है।
द्रिक पंचांग में नरक चतुर्दशी पर यमराज के 14 नामों का तीन-तीन बार उच्चारण करके तर्पण करने का विधान भी बताया गया है। इसमें जल अर्पित किया जाता है। शाम को यम देवता के लिए घर के बाहर दीपक जलाने की परंपरा भी बताई गई है।
क्या 14 नामों के लिए 14 अलग-अलग दीये जलाना जरूरी है
यहां एक बात समझना जरूरी है। यमराज के 14 नामों का उच्चारण करके तर्पण करना और 14 दीपक जलाना दो अलग-अलग धार्मिक परंपराएं हैं। इन्हें एक ही अनुष्ठान नहीं समझना चाहिए। कई घरों में नरक चतुर्दशी पर 14 दीपक जलाए जाते हैं। वहीं यमराज के 14 नामों का स्मरण करके तर्पण करने की भी परंपरा है। पूजा की विधि क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
इस दिन दीपदान का भाव केवल मृत्यु के भय से मुक्ति मांगना नहीं, बल्कि जीवन की नश्वरता को समझते हुए धर्म और अच्छे कर्मों के रास्ते पर चलने का संकल्प लेना भी है।
