'अपनी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं बालिग, शादी की उम्र जरूरी नहीं'; राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि दो बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं, भले ही वे विवाह योग्य उम्र के न हों। कोटा के युवक-युवती की सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित है और राज्य का दायित्व है कि वह नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

राजस्थान हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप पर एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि दो बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से साथ रहने का अधिकार रखते हैं, चाहे वे विवाह योग्य आयु के हों या नहीं। जस्टिस अनुप ढंढ की बेंच ने कोटा के एक युवक और युवती की सुरक्षा याचिका पर यह अहम टिप्पणी की।

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लिव-इन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया।(फोटो सोर्स: rajasthan high court )

“संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला”

अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। इस अधिकार में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या खतरा संविधान का उल्लंघन माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्तियों को अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है, और इसमें लिव-इन रिलेशनशिप का चुनाव भी शामिल है।

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