Hanumangarh Farmers Protest: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में एक निजी कंपनी द्वारा प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर किसानों का विरोध गुरुवार को भी जारी रहा। स्थानीय किसान और क्षेत्रीय नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर कार्रवाई होने तक वे निर्माणाधीन फैक्ट्री के खिलाफ आंदोलन जारी रखेंगे। गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में किसान टिब्बी स्थित विरोध स्थल के नजदीक गुरुद्वारे में इकट्ठा हुए। दूसरी ओर, सुरक्षा कारणों से क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन इंटरनेट सेवाएं बंद रही। जानकारी यह भी सामने आई है कि फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लगभग 30 परिवार भय के चलते अपने घर खाली कर अन्य स्थानों पर चले गए हैं।
हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ किसान प्रदर्शन (फोटो: ANI)
बुधवार को किसानों का विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने राठीखेड़ा गांव स्थित ‘ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड’ के निर्माणाधीन कारखाना परिसर में प्रवेश कर लिया। भीड़ ने कथित तौर पर फैक्ट्री की सीमा दीवार को गिरा दिया और कार्यालय सहित परिसर में मौजूद कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की, जिसके चलते दोनों ओर से झड़पें हुईं। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। उग्र भीड़ ने जवाब में पुलिस जीप समेत कई वाहनों को आग लगाकर भारी नुकसान पहुंचाया।
किसान नेता ने लगाए ये आरोप
किसान नेता रेशम सिंह मानुका का कहना है कि हमारी माता बहनों पर पुरुष पुलिसकर्मियों ने मारपीट की। हमारी माँग है कि फैक्ट्री हटाई जाए और जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और जो मुकदमे लगाए है वो वापस लिया जाए। किसान नेता रेशम सिंह का कहना है कि कल बार बार हमने कहा है कि प्रशासन का व्यक्ति आए और फेक्ट्री का काम रोकने की बात कहे। लेकिन प्रशासन ने पहल नहीं की। नेताओं ने राजनीति की आड़ में बिजनेस शुरू कर दिया है। जिस वजह से लोकतंत्र खतरे में है। हम विकास के विरोध में नहीं है लेकिन आबादी क्षेत्र से दस किलोमीटर दूर ये फैक्ट्री लगा दें। प्रशासन वार्ता में हमारे सवालों के जवाब देने में सक्षम नहीं है।
बुधवार की घटना में बिल्कुल बाहरी तत्व आए थे लेकिन वो फैक्ट्री वालों की तरफ़ से आए थे हमारे पास तो पेट्रोल था ही नही वो लोग ही पेट्रोल लाए और तोड़फोड़ की। एक सप्ताह में अगर फैक्ट्री नहीं हटाई गौ तो इससे भी बड़ा आंदोलन करेंगे।
महिलाओं समेत 50 से अधिक लोग घायल
विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं समेत 50 से अधिक लोग घायल हो गए। लाठीचार्ज में कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया के सिर में चोट लगने के बाद उन्हें हनुमानगढ़ जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हनुमानगढ़ के जिलाधिकारी डॉ. खुशाल यादव ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट के लिए सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त की जा चुकी हैं। उनके अनुसार, यह परियोजना 2022 में ‘राइजिंग राजस्थान समिट’ के दौरान अनुमोदित हुई थी, और भूमि परिवर्तन से लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी तक सभी प्रक्रियाएँ पूर्ण कर दी गई हैं।
कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ कार्रवाई
जिलाधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने शांतिपूर्ण महापंचायत की अनुमति तो दी थी, लेकिन कुछ तत्वों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए कारखाने की ओर कूच कर स्थिति बिगाड़ दी। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने कानून व्यवस्था को चुनौती दी है और ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। हम सभी से अपील करते हैं कि शांति बनाए रखें और हिंसा से दूर रहें।” यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतों के समाधान के लिए कई संवैधानिक और कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं। यदि किसी को कोई आपत्ति या सवाल है, तो उसे उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से दूर किया जा सकता है, मगर कानून को हाथ में लेना बिल्कुल टाला जा सकता था।
सुरक्षाबल मौके पर तैनात
टिब्बी और राठीखेड़ा गांव में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पुलिस, आरएसी और होमगार्ड के अतिरिक्त दल तैनात किए गए हैं। गुरुवार को बाजार खुलने के साथ क्षेत्र में शांति का माहौल दिखाई दिया, हालांकि किसान विरोध स्थल के पास गुरुद्वारे में जुटते रहे। दोपहर में किसान अपनी अगली रणनीति तय करने के लिए बैठक करने वाले हैं। घायल महिलाओं सहित कई प्रदर्शनकारियों ने रात गुरुद्वारा सिंह सभा में ही गुजारी। इस आंदोलन को कांग्रेस, माकपा तथा हरियाणा और पंजाब के कई किसान संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है।
फैक्टरी हटाओ संघर्ष समिति के प्रमुख ने क्या बताया?
फैक्टरी हटाओ संघर्ष समिति के प्रमुख रवजोत सिंह ने आरोप लगाया कि टकराव में महिलाओं सहित 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं। उनके अनुसार, 100 से ज्यादा किसान रातभर गुरुद्वारे में ठहरे, और सुबह होते ही और भी लोग वहां पहुंचने लगे। कांग्रेस नेता शबनम गोदारा ने कहा कि हुई हिंसा के लिए पूरी तरह प्रशासन जिम्मेदार है। उनका कहना है कि किसानों ने सिर्फ इतना ही मांग की थी कि निर्माण कार्य रोकने का लिखित आश्वासन दिया जाए, लेकिन उनकी वैध चिंताओं का समाधान करने की बजाय प्रशासन ने माहौल को भड़काया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोगों को केवल रोजगार के खोखले वादों से गुमराह किया जा रहा है। गोदारा ने स्पष्ट किया कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। किसान संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित फैक्ट्री को अभी तक पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिली। उनका कहना है कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति और आवश्यक अनुमतियों के निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। उधर, ड्यून इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड का दावा है कि यह परियोजना केंद्र सरकार के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थापित की जा रही है।
(इनपुट - भाषा)
