Zihaal e Miskeen: इश्क, दर्द और इबादत की जुगलबंदी ने रचा था 'जिहाल-ए-मिस्कीन..', जानिए अमीर खुसरो के इस अमर गीत का सही मतलब

Zihaal-e-Miskeen song meaning in Hindi: जिहाल ए मिस्कीन अमीर खुसरो की एक ऐसी रचना है, जो प्रेम, दर्द और आध्यात्मिकता को एक साथ बयान करती है। यह रचना हमें प्रेम की उस गहराई तक ले जाती है, जहां प्रेमी और प्रिय का भेद मिट जाता है।

Zihaal-e-Miskeen : अमीर ख़ुसरो उन प्रतिभाशाली हस्तियों में से एक थे जो सदीयों बाद कभी जन्म लेती हैं। तुर्की मूल के होने के बावजूद उनकी आत्मा हिंदुस्तानी थी। उनका व्यक्तित्व अपने आप में बहुआयामी था। वो एक समय में एक साथ शायर, चिंतक, सिपाही, सूफ़ी, अमीर और दरवेश थे। अमीर ख़ुसरो उन लोगों में से थे जिनको क़ुदरत सिर्फ़ मुहब्बत के लिए पैदा करती है। उनको हर शख़्स और हर चीज़ से मुहब्बत थी। हिन्दी और फ़ारसी के मिश्रण से कही गई उनकी ग़ज़लें अजीब रंग पेश करती हैं। शायद ही कोई हो जिसने उनकी ग़ज़ल "ज़ेहाल-ए-मिस्कीं न सुनी हो और इसके पुरसोज़ मगर परम आनंद के लुत्फ़ से वंचित रह गया हो। यह एक ऐसी रोमांटिक ग़ज़ल है जो शास्त्रीय फ़ारसी (फ़ारसी) और हिंदी की एक पुरानी बोली के बीच बारी-बारी से काम करती है। खुसरो की यह रचना सूफी दर्शन से गहरे प्रभावित है, जिसमें प्रेम को ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग माना गया है। पढ़ें पूरी गजल:

Zihaale Miskin

ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल..

ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैना बनाए बतियां

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