योगशास्त्र में प्राणायाम को जीवन शक्ति को नियंत्रित और बढ़ाने का आसान साधन माना गया है। यह सिर्फ सांस लेने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि नाड़ियों को संतुलित करने और शरीर-मन को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। इन्हीं प्राणायामों में से एक है सूर्यभेदन प्राणायाम, जो शरीर में गर्मी और ऊर्जा बढ़ाने के लिए जाना जाता है।
सूर्यभेदन प्राणायाम का अर्थ
‘सूर्य’ का मतलब गर्मी और ऊर्जा से है और ‘भेदन’ का अर्थ है जागृत करना। इस प्राणायाम में दाहिनी नासिका से सांस लेकर शरीर की पिंगला नाड़ी (सूर्य नाड़ी) को सक्रिय किया जाता है। इससे शरीर में गर्मी, ताकत और स्फूर्ति बढ़ती है। योग के पुराने ग्रंथों में इसे एक महत्वपूर्ण प्राणायाम माना गया है।
सूर्यभेदन प्राणायाम के फायदे
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह प्राणायाम शरीर को गर्म रखने में मदद करता है, इम्यूनिटी को मजबूत करता है और सर्दी के मौसम में जकड़न से राहत देता है। खासकर सर्दियों में इसका अभ्यास ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इसे नहीं करना चाहिए।
सूर्यभेदन प्राणायाम करने का आसान तरीका
इस प्राणायाम को करना बहुत सरल है -
- सुखासन या किसी आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं
- बाईं नासिका को बंद करें और दाहिनी नासिका से गहरी सांस लें
- सांस भरने के बाद दोनों नासिकाएं बंद कर कुछ सेकंड रोकें
- अब बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें
- इसे एक चक्र माना जाता है। रोज सुबह खाली पेट 10–15 चक्र करना लाभदायक होता है।
एक्सपर्ट और आयुर्वेद की राय
योग विशेषज्ञों के अनुसार सूर्यभेदन प्राणायाम करने से सर्दी-जुकाम, नाक बंद होने जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। आयुर्वेद मानता है कि यह प्राणायाम शरीर की आंतरिक गर्मी (अग्नि) बढ़ाता है, पाचन सुधारता है और कफ दोष में खास तौर पर फायदेमंद है। साथ ही यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाकर शरीर को ऊर्जावान और सक्रिय बनाता है।
इनपुट - आईएएनएस
