सवाल कितना भी बदतमीजी से पूछा जाए, जवाब तमीज से दें- क्यों जरूरी है सुष्मिता सेन की सलाह?

सामने वाला क्या कहेगा, यह हमारे नियंत्रण में नहीं। लेकिन उसके जवाब में हम क्या चुनते हैं, यह जरूर हमारे हाथ में है।

किसी का लहजा खराब हो तो उसी अंदाज में जवाब देना आसान लगता है, लेकिन सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) को 21 साल की उम्र में मिली एक सलाह ने उन्हें सिखाया कि सामने वाले के व्यवहार से ज्यादा जरूरी है कि आप खुद कैसे पेश आते हैं।

Sushmita Sen

हर किसी के लिए क्यों जरूरी है सुष्मिता सेन को मिली ये सीख (Photo: Sushmita Sen insta)

करियर के शुरुआत में सुष्मिता सेन को किसी ने कहा था- आपसे सवाल कितना भी बदतमीजी से पूछा जाए, जवाब हमेशा तहजीब से देना। वजह भी उन्होंने याद रखी: इतिहास सवाल को याद नहीं रखेगा, जवाब को याद रखेगा। यह बात उनके जेहन में इतनी गहराई से बैठी कि सार्वजनिक जीवन में असहमति जताते हुए भी अपनी बात सम्मान के साथ रखना उनकी आदत बन गई। सुष्मिता ने इस बात को गांठ बांध ली कि सामने वाला आपको कितना भी उकसाए, अपनी प्रतिक्रिया का नियंत्रण उसके हाथ में न दें।

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