Co-Living Trend in India: हाल ही में सैयारा रिलीज हुई है। फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई है। इस फिल्म ने रातोंरात अहान पांडे को सुपरस्टार बना दिया है। अहान पांडे बॉलीवुड एक्टर चंकी पांडे के भतीजे हैं। एक्ट्रेस अनन्या पांडे अहान की कजिन हैं। अहान ने एक वीडियो ब्लॉग में बताया था कि वह कजिन्स के साथ एक ही घर में रहते हैं। मुंबई में चार फ्लोर वाले आलीशान घर में अहान और उनके कजिन्स को-लिविंग में रहते हैं। अहान के इस वीडियो के बाद फैंस ये जानना चाहते थे कि आखिर ये को-लिविंग है क्या? जॉइंट फैमिली और को-लिविंग में क्या अंतर है?
Saiyaara स्टार अहान पांडे ने हाल ही मे बताया था कि वह अपने कजिन्स के साथ को-लिविंग में रहते हैं। (Photos: Ahaan Pandey Instagram)
क्या होती है को लिविंग? (What is Co-Living)
को-लिविंग रहने की वह व्यवस्था है जहां एक ही छत के नीचे लोग रहते हैं, लेकिन एक दूसरे को जवाबदेही नहीं होती। अहान पांडे का परिवार और चंकी पांडे का परिवार एक ही घर के चार फ्लोर्स पर रहता है। हालांकि दोनों के परिवार एक दूसरे के फैसलों में दखल नहीं देते। को-लिविंग में लोग एक साथ स्पेस, किचन और कॉमन एरिया शेयर करते हैं। हालांकि दोनों कमाई और खर्च अपने हिसाब से करते हैं।
जॉइंट फैमिली से अलग होती है को-लिविंग (Difference between Co-living and Joint Family)
बहुत से लोग ये सोचते हैं को-लिविंग मतलब जॉइंट फैमिली में रहना। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। को-लिविंग और जॉइंट फैमिली में कई अंतर हैं। जॉइंट फैमिली में सिर्फ परिवार के लोग साथ रहते हैं, जबकि को-लिविंग में जरूरी नहीं कि खून के रिश्ते वाले ही साथ रहें। नए-पुराने दोस्त या फिर एक दूसरे से बिल्कुल अनजान लोग भी को-लिविंग में रह सकते हैं।
जॉइंट फैमिली और को-लिविंग में सबसे बड़ा अंतर ये है कि जॉइंट फैमिली में परिवार का एक मुखिया होता है। घर-परिवार से संबंधित फैसले वही लेता है। परिवार के दूसरे सदस्य उस हेड ऑफ द फैमिली के प्रभाव में होते हैं। जबकि को-लिविंग में अगर परिवार के लोग भी साथ हैं तो सब अपने-अपने फैसले खुद लेते हैं। यहां परिवार का मुखिया जैसी कोई चीज नहीं होती। को-लिविंग में रहने वाले सारे सदस्य बराबर होते हैं।
को-लिविंग के फायदे (Benefits of Co-living)
बड़े शहरों में को-लिविंग का ट्रेंड तेजी से बढ रहा है। दरअसल को-लिविंग में रहना किफायती साबित होता है। इस तरह की व्यवस्था में फर्नीचर से मेंटेनेंस तक का खर्च बंट जाता है। आसान भाषा में समझें तो अकेले के लिए सिंगल या सेपरेट मकान लेना महंगा पड़ता है। को-लिविंग आपको सहूलियत देता है कि एक ही घर में अलग-अलग कमरे लें और कॉमन स्पेस और उसके खर्चे आपस में शेयर करें।
अंजान शहर में नौकरी करने पहुंचे युवाओं के लिए को-लिविंग बेस्ट ऑप्शन है। को-लिविंग के लिए घर देने वाले कई निजी वेबसाइट और एप्स भी आ गए हैं। ये एप्स आपको को-लिविंग के लिए पार्टनर्स ढूंढने में मदद करते हैं। को-लिविंग नए शहर में रिश्ते बनाने का भी मौका देता है। अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले लोगों के साथ रहने में आपको नया माहौल मिलता है और करियर के नए मौके भी मिलते हैं।
दिल्ली, मुंबई, पुणे और बेंगलुरू जैसे शहर में को-लिविंग का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है। बहुत से स्टार्टअप्स ने को-लिविंग बिजनेस के क्षेत्र में कदम रख दिया है। आने वाले दिनों में यह व्यवस्था भारत के छोटे शहरों तक भी पहुंच सकती है।
