Roshni Shayari in Hindi: यूं तो सुनने में रोशनी शब्द बहुत छोटा है, लेकिन अपने अंदर ये जादू समेटे है। इस शब्द को सुनते ही मन में उजाले की एक लहर दौड़ जाती है। चाहे दीये की लौ हो, सूरज की किरण हो या किसी के चेहरे की मुस्कान, रोशनी कैसी भी हो हमें खुश कर देती है। दरअसल जहां अंधेरा होता है वहां डर, भ्रम और उदासी बस जाती है। लेकिन जैसे ही रोशनी आती है, सब कुछ साफ दिखने लगता है। यही रोशनी जीवन का रूपक भी है जो हमें सिखाती है कि मुश्किलें कितनी भी गहरी क्यों न हों, एक छोटी-सी किरण भी रास्ता दिखा सकती है। इसी रोशनी पर कई शायरों ने सुंदर शेर लिखे हैं। आइए पढ़े रोशनी पर शायरी हिंदी में:
रोशनी पर शायरी हिंदी, उर्दू
1. चांद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है
- फ़रहत एहसास
2. अंधेरों को निकाला जा रहा है
मगर घर से उजाला जा रहा है
- फ़ना निज़ामी कानपुरी
3. बहुत सुकून से रहते थे हम अंधेरे में
फ़साद पैदा हुआ रौशनी के आने से
- आलम ख़ुर्शीद
4. नहीं है मेरे मुक़द्दर में रौशनी न सही
ये खिड़की खोलो ज़रा सुब्ह की हवा ही लगे
- बशीर बद्र
5. उल्फ़त का है मज़ा कि 'असर' ग़म भी साथ हों
तारीकियाँ भी साथ रहें रौशनी के साथ
- असर अकबराबादी
6. रौशनी फैली तो सब का रंग काला हो गया
कुछ दिए ऐसे जले हर-सू अंधेरा हो गया
- आज़ाद गुलाटी
8. रौशन-दान से धूप का टुकड़ा आ कर मेरे पास गिरा
और फिर सूरज ने कोशिश की मुझ से आँख मिलाने की
- हुमैरा रहमान
9. रौशनी मुझ से गुरेज़ाँ है तो शिकवा भी नहीं
मेरे ग़म-ख़ाने में कुछ ऐसा अँधेरा भी नहीं
- इक़बाल अज़ीम
10. घर से बाहर नहीं निकला जाता
रौशनी याद दिलाती है तिरी
- फ़ुज़ैल जाफ़री
11. रौशनी में अपनी शख़्सियत पे जब भी सोचना
अपने क़द को अपने साए से भी कम-तर देखना
- हिमायत अली शाएर
12. दलील-ए-ताबिश-ए-ईमाँ है कुफ़्र का एहसास
चराग़ शाम से पहले जला नहीं करते
- शकील बदायूनी
13. ख़ुद ही परवाने जल गए वर्ना
शम्अ जलती है रौशनी के लिए
- सनम प्रतापगढ़ी
14. नुमूद-ए-सुब्ह से शब की वो तीरगी तो गई
ये और बात कि सूरज में रौशनी कम है
- सय्यद नवाब अफ़सर लखनवी
15. कहीं कोई चराग़ जलता है
कुछ न कुछ रौशनी रहेगी अभी
- अबरार अहमद
16. देते नहीं सुझाई जो दुनिया के ख़त्त-ओ-ख़ाल
आए हैं तीरगी में मगर रौशनी से हम
- अंजुम रूमानी
17. एक सुरूद-ए-रौशनी नीमा-ए-शब का ख़्वाब था
एक ख़मोश तीरगी सानेहा-आश्ना भी थी
- जौन एलिया
18. रौशनी जब से मुझे छोड़ गई
शम्अ रोती है सिरहाने मेरे
- असग़र वेलोरी
19. नई सहर के हसीन सूरज तुझे ग़रीबों से वास्ता क्या
जहाँ उजाला है सीम-ओ-ज़र का वहीं तिरी रौशनी मिलेगी
- अबुल मुजाहिद ज़ाहिद
20. मंज़रों से बहलना ज़रूरी नहीं घर से बाहर निकलना ज़रूरी नहीं
दिल को रौशन करो रौशनी ने कहा रौशनी के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल
- इरफ़ान सत्तार
21. अनगिनत सफ़ीनों में दीप जगमगाते हैं
रात ने लुटाया है रंग-ओ-नूर पानी पर
- अक़ील नोमानी
22. सवाल ये है रौशनी वहाँ पे रोक दी गई
जहाँ पे हर किसी के हाथ में नया चराग़ था
- अफ़ज़ल गौहर राव
23. घुटन तो दिल की रही क़स्र-ए-मरमरीं में भी
न रौशनी से हुआ कुछ न कुछ हवा से हुआ
- ख़ालिद हसन क़ादिरी
24. रौशनी की अगर अलामत है
राख उड़ती है क्यूँ शरारे पर
- ख़ालिद मलिक साहिल
25. आंख से किस ने रौशनी माँगी
ख़्वाब के नाम ज़िंदगी माँगी
- ताबिंदा मसूद
उम्मीद करते हैं कि दीवाली की जगमग के बीच रोशनी पर लिखे ये खूबसूरत शेर आपके मन और दिल, दोनों को एक ठहराव और सुकून की रोशनी से जमका देगा। अगर आपको ये रोशनी शायरी पसंद आई हो तो आप इन्हें अपनों के साथ शेयर भी कर सकते हैं।
