Sustainable Parenting: कुछ समय पहले ही क्यूट सी बेबी गर्ल ज़ुनैरा के पेरेंट्स बने बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अली फज़ल और उनकी पत्नी रिचा चड्ढा का पेरेंटिंग स्टाइल काफी वायरल हो रहा है। कपल ने खुलासा किया कि वे बेटी को पालने में सचेत और संतुलित दृष्टिकोण फॉलो करने की कोशिश कर रहे हैं। जो बिटिया के पालन पोषण के साथ साथ उनकी सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में भी बहुत सहायक साबित होगा। बेशक ही बच्चें पालने की जिम्मेदारी बहुत ही खूबसूरत मगर बड़ी जिम्मेदारी होती है, जिसके साथ हाथो में हाथ डाले बहुत सारी अन्य जिम्मेदारियां भी पेरेंट्स के जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। ऐसे में एक बड़ी जिम्मेदारी प्रकृति के प्रति भी होती है, जिसके लिए ही अली और ऋचा खास पेरेंटिंग स्टाइल फॉलो करते हैं, जिसे वैसे तो लगभग हर भारतीय घर फॉलो करता है लेकिन सेलेब्स कम ही ऐसा करते दिखते हैं।
Richa Chadha's Follows Sustainable Parenting Style
मां नहीं बनना चाहती थीं ऋचा
अब अपनी पेरेंटहुड जर्नी को दिल खोलकर एन्जॉय कर रहे कपल ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कैसे ऋचा लंबे समय तक मां नहीं बनना चाहती थीं। जिसकी वजह जान आप भी चौंक जाएंगे, दरअसल ऋचा क्लाइमेट चेंज यानि जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चा पैदा नहीं करना चाह रही थीं। लेकिन उनका यह दृष्टिकोण बदला, हालांकि पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी के प्रति उनका दृष्टिकोण अब भी मजबूत है। और इसी दृष्टिकोण के कारण ऋचा आज खास सस्टेनेबल पेरेंटिंग स्टाइल फॉलो करती हैं।
ऋचा ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा थआ कि, “मैं नहीं चाहती कि मैं एक उपभोक्ता रोबोट बन जाऊं, जो लगातार और अधिक चीजें खरीदे, जिनका प्लास्टिक में लपेटा जाना और फिर समुद्रों में फेंका जाना हो। ऋचा ने ये भी बताया था कि, उनके पति अली सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रति बहुत सचेत हैं, खासकर बच्चे के लिए। एक साल पहले, मैं बच्चा पैदा करने के खिलाफ थी, और जलवायु परिवर्तन इसका एक बड़ा कारण था। यह साल अब तक का सबसे गर्म साल है, और शायद यह वो ठंडा साल है जो हम आगे अनुभव करेंगे, ऐसे में पर्यावरण संबंधी चिंता एक वास्तविक बात है।
क्या है सस्टेनेबल पेरेंटिंग
बहुत से भारतीय घरों में खासतौर से पहले के जमाने में तो इस पेरेंटिंग स्टाइल को फॉलो किया ही जाता रहा है। जिसमें बच्चों को पुराना तो जरूरत के अनुसार वाला सामान रियुज कर ही पाला जाता था। हालांकि आज के जमाने में हर वक्त नया सामान खरीदने और दिखावा करने का चलन चल पड़ा है, जो प्रकृति के लिए खराब साबित हो रहा है। अधिक सामान का उत्पादन, पैसे और रिसोर्स का वेस्टेज कम करना ही सस्टेनेबल जीवन जीना है।
