हर छोटी बात पर मांगने लगते हैं माफी, लोग कैसे बन जाते हैं क्रॉनिक अपोलोजाइजर

आपकी मौजूदगी को किसी स्पष्टीकरण या डिस्क्लेमर की जरूरत नहीं है। इस दुनिया में अपनी जगह लेने के लिए आपको हर बार माफी मांगने की कोई आवश्यकता नहीं है।

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो बिना किसी बड़ी बात के, बस अपनी मौजूदगी या छोटी-मोटी असुविधा के लिए भी तुरंत 'सॉरी' बोल देते हैं? किसी से सवाल पूछने पर, रास्ता मांगने पर या अपनी बात रखने से पहले भी मुंह से माफी का शब्द निकल जाना बहुत आम बात है। मनोचिकित्सकों का मानना है कि इसके पीछे एक गहरा मनोवैज्ञानिक पैटर्न छिपा होता है।

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जानिए क्या है हर छोटी बात पर माफी मांगने के पीछे के 4 मनोवैज्ञानिक कारण (Photo: iStock)

क्यों पड़ जाती है बात-बात पर माफी मांगने की आदत

साइकोथेरेपिस्ट्स की मानें तो बहुत ज्यादा माफी मांगने की यह आदत इस बात का संकेत है कि व्यक्ति ने अतीत में कुछ ऐसे हालात का सामना किया है जिसने उसके भीतर यह पैटर्न तैयार कर दिया है। लोग अक्सर अपनी जगह घेरने, कोई सवाल पूछने या दूसरों को असहज न करने के डर से हर बात पर झुक जाते हैं। आइए जानते हैं कि लोग क्यों जरूरत से ज्यादा सॉरी बोलते हैं और इसके पीछे कौन से चार मुख्य कारण जिम्मेदार होते हैं:

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