Rang Shayari in Hindi (रंग पर शायरी): आसमान का नीला विस्तार हो या पत्तों की हरियाली, सूरज का सुनहरा उजाला हो या फिर शाम का केसरिया आभा, प्रकृति का हर रूप रंगों से ही जीवंत होता है। यदि जीवन से रंग हटा दिए जाएं, तो संसार एक सूनी तस्वीर बनकर रह जाए। हर रंग का अपना अर्थ और असर होता है। लाल रंग ऊर्जा, प्रेम और साहस का प्रतीक है, तो सफेद शांति और पवित्रता का। हरा रंग आशा और विकास की बात करता है, जबकि नीला गहराई और विश्वास का एहसास कराता है। इन्हीं रंगों पर कई शायरों ने एक से एक बेहतरीन शेर लिखे हैं। आइए पढ़ें रंग पर शायरी हिंदी में:
रंग पर 20 मशहूर शेर
1. तमाम रात नहाया था शहर बारिश में
वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे
- जमाल एहसानी
2. फीकी है हर चूनरी,फीका हर बन्देज
जो रंगता है रूप को, वो असली रंगरेज़
- हस्तीमल 'हस्ती'
3. रंग दरकार थे हम को तिरी ख़ामोशी के
एक आवाज़ की तस्वीर बनानी थी हमें
- नाज़िर वहीद
4. सुकूत-ए-शाम का हिस्सा तू मत बना मुझ को
मैं रंग हूँ सो किसी मौज में मिला मुझ को
- अली ज़रयून
5. लब-ए-नाज़ुक के बोसे लूँ तो मिस्सी मुँह बनाती है
कफ़-ए-पा को अगर चूमूँ तो मेहंदी रंग लाती है
- आसी ग़ाज़ीपुरी
6. किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहीं
वो रंग है ही नहीं जो तिरे बदन में नहीं
- फ़रहत एहसास
7. कब तक चुनरी पर ही ज़ुल्म हों रंगों के
रंगरेज़ा तेरी भी क़बा पर बरसे रंग
- स्वप्निल तिवारी
8. तुम्हारे रंग फीके पड़ गए ना?
मिरी आंखों की वीरानी के आगे
- फरीहा नक़वी
9. अजब बहार दिखाई लहू के छींटों ने
ख़िज़ां का रंग भी रंग-ए-बहार जैसा था
- जुनैद हज़ीं लारी
10. अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे
मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले
- सालिम सलीम
11. हवा में नश्शा ही नश्शा फ़ज़ा में रंग ही रंग
ये किस ने पैरहन अपना उछाल रक्खा है
- अहमद फ़राज़
12. रंग ही से फ़रेब खाते रहें
ख़ुशबुएं आज़माना भूल गए
- अंजुम लुधियानवी
13. गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
14. वो आए तो रंग सँवरने लगते हैं
जैसे बिछड़ा यार भी कोई मौसम है
- फ़रहत ज़ाहिद
15. ऐ रंग रंग में आ आग़ोश-ए-तंग में आ
बातें ही रंग की हैं रंगत नहीं है मुझमें
- जौन एलिया
16. वो रंग रंग के छींटे पड़े कि उस के ब'अद
कभी न फिर नए कपड़े पहन के निकला मैं
- अनवर शऊर
17. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया
अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया
- खालिद गनी
18. सांस लेता हुआ हर रंग नज़र आएगा
तुम किसी रोज़ मिरे रंग में आओ तो सही
- अज़ीज़ नबील
19. होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने
नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समाँ है
- शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
20. हज़ार रंग-ब-दामाँ सही मगर दुनिया
बस एक सिलसिला-ए-एतिबार है, क्या है
- निकहत बरेलवी
