कपड़े सिर्फ पहनने की चीज नहीं होते, कई बार उनमें पूरा इतिहास छिपा होता है। भारत-पाकिस्तान का बंटवारा जब हुआ, तब लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर दूसरी जगह बसना पड़ा। उनके साथ सामान कम था, लेकिन यादों में बसे रंग, डिजाइन, सिलाई और कढ़ाई भी सफर पर निकल पड़ी। यही वजह है कि आज भारतीय फैशन में ऐसे कई काम नजर आते हैं, जिनकी जड़ें उस साझा सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हैं जो विभाजन से पहले पंजाब, सिंध और आसपास के इलाकों में फल-फूल रही थी।
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फुलकारी इसका सबसे खूबसूरत उदाहरण है। वहीं सिंधी कढ़ाई, अजरख जैसे प्रिंट और कुछ ट्रेडिशनल बुनाई की कहानियां भी सीमाओं से कहीं पुरानी हैं। बंटवारे के बाद कारीगरों और परिवारों के नए ठिकानों ने इन कलाओं को नए बाजार और नए रूप दिए। यानी फैशन की अलमारी में मौजूद ये डिजाइन सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि लोगों के सफर और सांस्कृतिक जुड़ाव की निशानी भी हैं।
फुलकारी: पंजाब की कढ़ाई जो साथ चली
फुलकारी का नाम आते ही रंग-बिरंगे धागों से बने फूल और ज्यामितीय पैटर्न याद आते हैं। यह कढ़ाई पंजाब के पारंपरिक जीवन का अहम हिस्सा रही है। विभाजन के दौरान जब परिवार अलग-अलग जगहों पर पहुंचे, तो फुलकारी भी उनके साथ आई।
भारत में खासकर पंजाब और हरियाणा जैसे इलाकों में इस कढ़ाई को नए कपड़ों और डिजाइनों के साथ अपनाया गया। आज फुलकारी दुपट्टे, कुर्ते, जैकेट और यहां तक कि मॉडर्न वियर में भी दिखाई देती है।
सिंधी कढ़ाई: धागों में छिपे रंग
सिंधी कढ़ाई अपनी चमकदार रंगत, छोटे-छोटे पैटर्न और बारीक काम के लिए पहचानी जाती है। सिंध से आए परिवारों और कारीगरों ने भारत में बसने के बाद अपनी पारंपरिक कला को आगे बढ़ाया।
समय के साथ इस कढ़ाई ने कपड़ों के अलावा बैग, होम डेकोर और एक्सेसरीज में भी जगह बनाई। यही बदलाव बताता है कि कोई कला जगह बदलने के बाद भी अपनी पहचान बचा सकती है।
अजरक की कहानी भी है खास
अजरक एक पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग शैली है, जो सिंध और कच्छ की सांस्कृतिक दुनिया से जुड़ी रही है। प्राकृतिक रंगों और हाथ से किए गए ब्लॉक प्रिंट इसके खास आकर्षण हैं। विभाजन के बाद इस कला की यात्रा भारत के कच्छ तक भी पहुंची। आज अजरक प्रिंट को साड़ियों, शर्ट, कुर्तों और स्टोल जैसे मॉडर्न कपड़ों में आसानी से देखा जा सकता है।
बंटवारे ने फैशन को क्या दिया?
विभाजन ने इन कलाओं को खत्म नहीं किया, बल्कि कई मामलों में उनकी यात्रा का रास्ता बदल दिया। नए शहरों में पहुंचे कारीगरों ने स्थानीय बाजार के हिसाब से डिजाइन बदले, नए कपड़ों पर काम किया और पुरानी तकनीकों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया। इसलिए आज जब हम फुलकारी वाला दुपट्टा या अजरक प्रिंट की शर्ट पहनते हैं, तो वह केवल फैशन स्टेटमेंट नहीं होता। उसके पीछे कारीगरों का हुनर, परिवारों का सफर और एक साझा सांस्कृतिक इतिहास भी जुड़ा होता है।
