आजकल बच्चों के हाथ में खिलौने से ज्यादा मोबाइल नजर आता है। दरअसल फोन बच्चों के लिए सबसे आसान मनोरंजन बन गया है। ऐसे में माता-पिता के सामने बड़ा सवाल है कि आखिर बच्चों को स्क्रीन से दूर कैसे रखा जाए? पेरेंट्स बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के लिए ना जाने क्या-क्या करते हैं। ऐसे पेरेंट्स को ये भी जान लेना चाहिए कि वो कुछ खास तरह के खिलौनों और एक्टिविटी से बच्चों को स्क्रीन से दूर कर सकते हैं।
ऐसे खिलौने बच्चों को टीवी मोबाइल से रखते हैं दूर (Photo: iStock)
क्या हर खिलौना बच्चे को स्क्रीन से करता है दूर
सिर्फ खिलौना खरीदकर बच्चे के हाथ में दे देना काफी नहीं है। कुछ खिलौने बच्चे को कुछ मिनट व्यस्त रख सकते हैं, लेकिन उनका आकर्षण जल्दी खत्म हो जाता है। वहीं ऐसे खिलौने, जिनमें बच्चे को कुछ बनाना या हल करना हो, ज्यादा समय तक उसका ध्यान बनाए रख सकते हैं। ऐसे खिलौने ज्यादा मददगार हो सकते हैं, जिनमें बच्चा खुद कुछ बनाता, सोचता और समस्या का हल खोजता है।
मसलन, बिल्डिंग ब्लॉक्स से बच्चा घर, पुल या अपनी कल्पना का कोई शहर बना सकता है। पजल में हर बार थोड़ी नई चुनौती मिल सकती है। साइंस किट बच्चे की जिज्ञासा को प्रयोग में बदल सकती है। इसी तरह ड्रॉइंग और आर्ट से जुड़ी चीजों में बच्चे के पास अपनी कल्पना इस्तेमाल करने की पूरी आजादी होती है।
खिलौना ऐसा हो, जिसमें बच्चा खुद फैसला ले
बच्चे को हर बार यह बताने की जरूरत नहीं कि अब क्या करना है। बेहतर होगा कि उसे कुछ विकल्प दिए जाएं और वह खुद चुने कि उसे क्या करना है। किसी बच्चे को चीजें बनाना पसंद हो सकता है। कोई पजल में दिलचस्पी ले सकता है तो कोई ड्रॉइंग या छोटे-छोटे प्रयोगों में। जब बच्चा अपनी पसंद की एक्टिविटी चुनता है तो उसे यह किसी आदेश की तरह नहीं लगती। उसे लगता है कि उसने खुद कुछ करने का फैसला किया है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसी वजह से आज ऐसे खिलौनों की मांग बढ़ रही है, जिनमें खेल के साथ सीखना भी शामिल हो। ऐसे खिलौने बच्चों को चीजों को आजमाने, गलती करने और फिर उसका हल खोजने का मौका देते हैं।
बच्चे किसी पुराने खिलौने से बोर हो गए हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि नया खिलौना खरीदना जरूरी है। उसी खिलौने को इस्तेमाल करने का तरीका बदला जा सकता है। बिल्डिंग ब्लॉक्स से इस बार घर बनाने की जगह पुल बनाने को कहें। पजल को थोड़ा मुश्किल बनाएं। ड्रॉइंग में कोई नया विषय दें। यानी खिलौना वही रहे, लेकिन चुनौती बदल जाए।
खिलौने सामने होंगे तो बच्चे खुद उठाएंगे
कई बार समस्या खिलौनों की कमी नहीं, उनकी पहुंच की होती है। मोबाइल हमेशा सामने और आसानी से उपलब्ध रहता है। इसके मुकाबले पजल अलमारी में बंद हो, किताबें ऊपर रखी हों या आर्ट का सामान बच्चे की पहुंच से दूर हो तो वह पहले मोबाइल ही उठाएगा। इसलिए किताबें, पजल, ब्लॉक्स, ड्रॉइंग का सामान और एक्टिविटी किट ऐसी जगह रखें, जहां बच्चा उन्हें आसानी से देख और उठा सके।
स्क्रीन का विकल्प सिर्फ खिलौना नहीं
यह समझना भी जरूरी है कि कोई एक खिलौना बच्चे का स्क्रीन टाइम खत्म नहीं कर सकता। आज की जिंदगी में स्क्रीन पढ़ाई, बातचीत और मनोरंजन का हिस्सा है। जरूरत इस बात की है कि स्क्रीन बच्चे के समय का एकमात्र सहारा न बन जाए।
किताब पढ़ना, बाहर खेलना, ड्रॉइंग करना, कुछ बनाना, पजल हल करना या अपनी कल्पना से कोई खेल तैयार करना, ये सभी बच्चे को अलग तरह से व्यस्त रखते हैं।
