एकतरफा प्यार के गम ने सिखाई शायरी, जानिए क्यों अपने ही पिता के जनाजे को कंधा नहीं दे पाए थे निदा फाजली

आज निदा फाजली की जयंती है। उनका जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ था। उनका असली नाम मुक्तदा हसन फाजली था।

कुछ शायर अपने अल्फाज से महफिल सजाते हैं, कुछ अपनी शायरी से जिंदगी को समझने का नजरिया देते हैं। निदा फाजली ऐसे ही शायर थे। उनकी शायरी में न भारी-भरकम शब्दों का बोझ था, न भावनाओं को दिखाने की कोई बनावटी कोशिश। वे घर, आंगन, रिश्तों, बच्चों, चिड़ियों और इंसान के भीतर चलने वाली उथल-पुथल में कविता तलाशते थे। उनकी खासियत थी कि वे आम जिंदगी की किसी छोटी-सी बात को इस तरह कहते थे कि वह सुनने वाले के अपने अनुभव का हिस्सा बन जाती थी।

Nida Fazli Biography

निदा फाजली जयंती स्पेशल

एकतरफा प्यार ने सिखाई शायरी

निदा फाजली को कभी मुकम्मल ना हो पाने वाले प्‍यार ने शायर बनाया था। दरअसल जब वह ग्वालियर कॉलेज में पढ़ते थे तो क्लास में उनके आगे की कतार में एक लड़की बैठा करती थी। उससे वह मन ही मन चाहने लगे थे। उन्होंने सोचा था कि जब सही वक्त आएगा तो उससे अपने दिल की बात कह देंगे। हालांकि कुदरत ने उनकी ये तमन्ना कभी पूरी ना होने गी।

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