आज नाचोज पॉपुलर स्नैक्स बन चुका है। सिनेमा हॉल से कैफे और रेस्टोरेंट तक में आपको एक से एक वैरायटी के नाचोज मिल जाएंगे। आपने भी नाचोज कभी ना कभी जरूर खाए होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पॉपुलर स्नैक्स का नाम नाचोज कैसे पड़ा? अगर नहीं जानते तो इसे जानने के लिए आपको करीब 80 साल पीछे चलना होगा।
कब और कैसे पड़ा था इस चटपटे स्नैक्स का नाम (Photo: iStock)
बात मेक्सिको की है। साल था 1943। जगह पीएद्रास नेग्रास। यहां विक्ट्री क्लब नाम के एक छोटे से रेस्टोरेंट में इग्नासियो अनाया बतौर शेफ काम करते थे। एक रात अमेरिका के टेक्सास से कुछ आर्मी अफसर की पत्नियां रेस्टोरेंट पहुंचीं। वे खाना खाना चाहती थीं, लेकिन तब तक किचन बंद हो चुका था। ग्राहकों को खाली हाथ लौटाना इग्नासियो को ठीक नहीं लगा।
इग्नासियो अनाया किचन में गए और वहां मौजूद कुछ साधारण चीजें इकट्ठा कीं। उन्होंने टॉर्टिला को त्रिकोण आकार में काटकर तला, उसके ऊपर कद्दूकस किया हुआ चीज डाला और स्वाद बढ़ाने के लिए अचार वाली जलापेनो मिर्च रख दी। फिर इसे हल्का सा गर्म किया और उन औरतों के सामने परोस दिया।
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अमेरिका से आई इन तीनों महिलाओं को स्नैक खूब पसंद आया। उन्होंने पूरा प्लेट साफ कर दिया। खाने के बाद उन्होंने शेफ से पूछा कि इस डिश का क्या नाम है। अब शेफ ने तो ऐसे ही बची खुची चीजों से स्नैक्स तैयार कर दिया था, तो फिर नाम कहां से बताता।
उन औरतों ने फिर से डिश का नाम पूछा। शेफ इग्नासियो के मुंह से तपाक से निकल गया- नाचोज स्पेशल यानी नाचो की खास डिश। दरअसल इंग्नासियो अयाना का निकनेम नाचो था। उन्होंने इस डिश को अपने नाम से जोड़ कर बता दिया। आगे चलकर यह स्नैक और नाम दोनों दुनियाभर में फैल गए।
तो इस तरह से मजबूरी और जल्दबाजी में बने स्नैक्स नाचोज के रूप में स्वाद की दुनिया में एक नया नाम जुड़ गया। आज ना जाने कितनी तरह ते नाचोज मिलते हैं। बच्चो से बड़ों तक, हर किसी को नाचोज पसंद आती है।
नाचोज इस विश्वास को और पुख्ता करता है कि जिसकी किस्मत में जितनी शोहरत लिखी है उतनी मिलेगी ही। नाचोज के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ। इग्नासियो अनाया ने उस दिन जब भूखे ग्राहकों के लिए हड़बड़ी में नाचोज तैयार किया था तो उन्हें भी अंदाजा नहीं होगा कि आने वाले दिनों में ये स्नैक उनके नाम को दुनिया भर में मशहूर कर देगा।
