Women's Day 2026: आज के समय में माइग्रेन और स्ट्रोक सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गए हैं। खास बात यह है कि कई रिसर्च बताती हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में इन दोनों बीमारियों का खतरा ज्यादा देखा जाता है। कई बार महिलाएं बार-बार होने वाले सिरदर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन यही माइग्रेन आगे चलकर स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी, गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल और लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारण हो सकते हैं। आइए समझते हैं कि आखिर महिलाओं में माइग्रेन और स्ट्रोक का खतरा ज्यादा क्यों होता है और इसके प्रमुख रिस्क फैक्टर्स क्या हैं।
महिलाओं में माइग्रेन और स्ट्रोक क्यों बढ़ रहे हैं
हार्मोनल बदलाव भी बड़ी वजह
महिलाओं में माइग्रेन ज्यादा होने की एक बड़ी वजह हार्मोनल बदलाव माने जाते हैं। खासकर एस्ट्रोजन हार्मोन में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर दिमाग की नसों पर पड़ता है। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव तेज होते हैं, जिससे माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है। यही कारण है कि कई महिलाओं को पीरियड्स के आसपास सिरदर्द या माइग्रेन के अटैक ज्यादा आते हैं।
माइग्रेन और स्ट्रोक का गहरा संबंध
मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि माइग्रेन, खासकर माइग्रेन विद ऑरा, स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। ऑरा वाले माइग्रेन में सिरदर्द से पहले आंखों के सामने चमक, धुंधला दिखना या झिलमिलाहट जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। रिसर्च बताती है कि जिन महिलाओं को इस तरह का माइग्रेन होता है, उनमें स्ट्रोक का खतरा अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। इसलिए बार-बार होने वाले माइग्रेन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गर्भनिरोधक गोलियां भी बढ़ा सकती हैं जोखिम
कुछ महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल भी माइग्रेन और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकता है। खासकर वे महिलाएं जिन्हें पहले से माइग्रेन की समस्या है, उनके लिए यह जोखिम और बढ़ सकता है। डॉक्टरों के अनुसार यदि माइग्रेन के साथ-साथ धूम्रपान भी किया जाए, तो स्ट्रोक का खतरा कई गुना तक बढ़ सकता है।
प्रेग्नेंसी और प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताएं
गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ना, प्रीक्लेम्पसिया जैसी स्थितियां भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती हैं। कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान माइग्रेन के लक्षण बदल सकते हैं या बढ़ सकते हैं। इसलिए इस समय किसी भी तरह के तेज सिरदर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
लाइफस्टाइल और अन्य हेल्थ फैक्टर्स
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी भी माइग्रेन और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है। तनाव, नींद की कमी, गलत खान-पान, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कारण महिलाओं में इन समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। अगर किसी महिला को पहले से माइग्रेन है और साथ में डायबिटीज, हाई बीपी या स्मोकिंग की आदत भी है, तो स्ट्रोक का जोखिम और बढ़ सकता है।
कब सतर्क होना जरूरी है
अगर किसी महिला को बार-बार तेज सिरदर्द, आंखों के सामने चमक या धुंधलापन, बोलने में दिक्कत, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या अचानक चक्कर जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से माइग्रेन को नियंत्रित किया जा सकता है और स्ट्रोक के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
