भारत के पूर्व राजघरानों के महाराजाओं की विलासता और राजसी ठाठ बाट के किस्से आज तक मशहूर हैं। बड़े-बड़े महलों में रहने से लेकर इन राजा-महाराजाओं के कपड़े-गहने देश विदेश से बनकर आते थे। जिनकी कीमत का तो आप आज अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। देश के सबसे अमीर महाराजाओं का जीवन विलासिता से भरा हुआ था, और उन्होंने जीवन की सभी बेशकीमती लग्जरी चीजों का आनंद लिया है। इनमें से एक प्रसिद्ध महाराजा थे कपूरथला के जगतजीत सिंह भी रहे हैं। जिनकी लाइफस्टाइल तो पहनावे को आज तक याद किया जाता है। महाराजा के पास कई बेशकीमती आभूषण थे, लेकिन इन सबमें उनकी कार्टियर की कलगी सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही है। देखें आखिर उस कलगी में क्या खासियत है -
महाराजा जगतजीत सिंह का परिचय
महाराजा जगतजीत सिंह साहिब बहादुर (24 नवंबर 1872 - 19 जून 1949) एक ऐसे राजकुमार थे, जिन्होंने अपनी संपत्ति और विलासिता के लिए प्रसिद्धि प्राप्त की थी। उन्होंने कपूरथला को पंजाब का पेरिस बनाने का सपना देखा और अपने व्यक्तिगत सौंदर्य के लिए फ्रांसीसी शैली को अपनाया था। उनके द्वारा पहने गए आभूषण, जैसे पगड़ी के आभूषण और हीरे की हार, उनकी विलासिता की कहानी बयां करते हैं।
कार्टियर के साथ बनाए आभूषण
महाराजा ने प्रसिद्ध फ्रांसीसी ज्वेलरी हाउस कार्टियर के साथ मिलकर कई अद्भुत आभूषणों का निर्माण किया। इनमें से एक सबसे प्रसिद्ध आभूषण थी हरे एमरल्ड से बनी हुई कलगी, जिसे महाराजा अपनी पगड़ी पर सजाए रखते थे। इस कलगी को 1926 में बनाया गया था। इस आभूषण में 177.40 कैरेट का एक बड़ा, हेक्सागोनल आकार का एमरल्ड है, जो अपने गहरे हरे रंग और अद्वितीय जार्डिन के लिए प्रसिद्ध है।
क्या थी इस कलगी थी खासियत
इस पगड़ी के आभूषण में कुल 19 कोलंबियाई एमरल्ड शामिल हैं, जिनका आकार और कट अलग-अलग है। इन एमरल्ड को गुलाब के कटे हीरों और प्राकृतिक मोतियों से सजाया गया है। इस आभूषण का कुल वजन 432.24 कैरेट है, जिसमें मुख्य एमरल्ड के अलावा अन्य एमरल्ड का वजन भी शामिल है। यह आभूषण आर्ट डेको शैली में डिजाइन किया गया है, जो पारंपरिक भारतीय रूपों से प्रभावित है।
दूर दूर से लोग आए देखने
इस आभूषण की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि रोमानिया की रानी मैरी ने भी पेरिस में कार्टियर के फ्लैगशिप स्टोर पर इसे देखने के लिए यात्रा की। यह आभूषण न केवल एक व्यक्तिगत संपत्ति था, बल्कि यह भारतीय आभूषण कला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी था, जो समय के साथ मूल्यवान होता गया।
आज कहां है ये कलगी
आज, जगतजीत सिंह का यह हरा एमरल्ड पगड़ी का आभूषण न केवल एक ऐतिहासिक वस्तु है, बल्कि यह आधुनिक आभूषण नीलामियों में भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हाल ही में, एस्टागुरु ने अपनी 'लेगेसी ज्वेलरी, सिल्वर & टाइमपीस' नीलामी में इस तरह के राजसी आभूषणों को शामिल करने की योजना बनाई है, जिससे उनकी विरासत को संजोया जा सके। महाराजा जगतजीत सिंह का हरा एमरल्ड पगड़ी का आभूषण न केवल उनके वैभव का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय ज्वेलरी की समृद्धि और कला का एक अनूठा उदाहरण भी है। यह आभूषण आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है और भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।
