Madonna: कभी पोप से पंगा तो कभी पैट्रियार्की से जंग, पॉप कल्चर की सबसे बड़ी 'डिस्रप्टर' कैसे बनीं मडोना

"कला का काम सवाल पूछना है, जवाब देना नहीं। अगर मेरी आर्ट से लोग असहज हो रहे हैं, तो इसका मतलब है कि मैं सही रास्ते पर हू। मैं किसी से माफी नहीं मांगूंगी।"

1980 का दशक शुरू ही हुआ था। दुनिया बड़े तौर पर सांस्कृतिक बदलाव के दौर से गुजर रही थी। अमेरिका जैसे देशों में उस वक्त पॉप म्यूजिक पर मर्दों का एकछत्र राज था। म्यूजिक इंडस्ट्री के नियम पुरुष ही तय करते थे। तब महिलाएं महज ग्लैमरस फेस बनकर रह जाती थीं। फिर आया साल 1983 का। एक 24 साल की लड़की सामने आई। नाम था- मडोना लुईस चिकोन। 16 अगस्त 1958 को जन्मी उस लड़की को लोगों ने महज एक सिंगर समझा। यहीं वो चूक कर गए। मडोना ने आते ही पॉप म्यूजिक के सारे बने-बनाए नियम तोड़ दिए।

Madonna

पूरी दुनिया को असहज कर देने वाली मडोना के बगावत की असली कहानी (AI Generated Image)

उसने दो ऐसी ताकतों से सीधे लोहा लिया, जिनसे टकराने की हिम्मत उस दौर में कोई नहीं कर सकता था। जी हां, उस 24 साल की लड़की ने सीधे तौर पर कैथोलिक चर्च (वेटिकन/पोप) और म्युजिक इंडस्ट्री की पैट्रियार्की से पंगा ले लिया। आगे चलकर वही मडोना दुनियाभर में 'द ओरिजनल डिस्रप्टर' के तौर पर मशहूर हुई। आज मडोना के ज्नमदिन पर आइए जानते हैं कि इतना सब कुछ उन्होंने आखिर किया कैस।

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