'दुनिया की छत' कहे जाने वाले ल्हासा की कहानी, जानें इतनी ऊंचाई पर कैसे रहते हैं लोग

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान ल्हासा से ग्राउंड रिपोर्ट। जानिए दुनिया की छत कहे जाने वाले इस शहर में कैसी है जिंदगी, बरखोर स्ट्रीट, तिब्बती संस्कृति और भारतीय अंदाज वाली चाय की दिलचस्प कहानी।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान तिब्बत में प्रवेश करने वाले यात्रियों का सबसे अहम पड़ाव ल्हासा होता है। समुद्र तल से करीब 3,658 मीटर (11,975 फीट) की ऊंचाई पर बसा यह शहर दुनिया के सबसे ऊंचे शहरों में गिना जाता है। आध्यात्मिकता, प्राकृतिक सुंदरता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बसे इस शहर में इतनी अधिक ऊंचाई के कारण लोगों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आखिर वे कौन-सी चुनौतियां हैं और यहां की जिंदगी कैसी है? कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान ल्हासा से हमारी यह खास रिपोर्ट।

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ल्हासा ग्राउंड रिपोर्ट- कैसे रहते हैं लोग यहां

बरखोर स्ट्रीट... जहां आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जिंदा हैं

अगर ल्हासा तिब्बत का दिल है, तो बरखोर स्ट्रीट इस दिल की धड़कन है। यहां का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है 'कोरा'। कोरा यानी एक पवित्र परिक्रमा। जोखांग टेम्पल के चारों तरफ बने इस लगभग एक किलोमीटर लंबे रास्ते पर श्रद्धालु सुबह से लेकर देर रात तक क्लॉकवाइज दिशा में चलते हैं। हाथ में प्रेयर व्हील, होठों पर मंत्र और हर एक कदम में अनंत आस्था। कुछ श्रद्धालु तो पूरे रास्ते पर दंडवत प्रणाम (साष्टांग प्रणाम) करते हुए आगे बढ़ते हैं, जो देखने वालों को अंदर तक झकझोर देता है।

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