The Carnatic Wars: जब दक्कन की लड़ाई ने अंग्रेजों के लिए खोल दिया पूरे देश पर राज करने का रास्ता

इस किताब की अहमियत सिर्फ अतीत को समझने तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि बड़ी ताकतें कई बार सीधे युद्ध करने के बजाय स्थानीय संघर्षों और सहयोगियों के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाती हैं।

इतिहास की किताबों में प्लासी के युद्ध को भारत में अंग्रेजी राज की शुरुआत माना जाता है। लेकिन क्या भारत में अंग्रेजों की ताकत बढ़ने की कहानी बंगाल से ही शुरू हुई थी? क्या दक्षिण भारत में लड़ी गई कुछ लडाइयों ने उन्हें वह तरीका सिखाया, जिसका इस्तेमाल बाद में उन्होंने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर अपना दबदबा बनाने के लिए किया? लेखक वेंकटेश पार्थसारथी की किताब The Carnatic Wars ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशती है। यह किताब 18वीं सदी के उन संघर्षों की ओर ले जाती है, जिन्हें भारतीय इतिहास की चर्चाओं में अक्सर उतनी जगह नहीं मिलती, जितनी मिलनी चाहिए।

The Carnatic Wars

बुक रिव्यू: The Carnatic Wars

सिर्फ अंग्रेजों और फ्रांसीसियों की कहानी नहीं

18वीं सदी का भारत राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा था। मुगल सत्ता कमजोर हो रही थी और अलग-अलग क्षेत्रीय शासक अपनी ताकत बढाने में जुटे थे। इसी दौर में अंग्रेज और फ्रांसीसी व्यापारिक कंपनियां भी भारत में अपना प्रभाव बढाने की कोशिश कर रही थीं। उनका मकसद केवल व्यापार करना नहीं रह गया था। वे स्थानीय राजनीति और सत्ता के संघर्षों में भी दखल देने लगी थीं।

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