Oct 24, 2026
समुद्र तट पर आपने सुनहरी या सफेद रेत तो देखी होगी, लेकिन क्या कभी काली रेत वाला बीच देखा है?
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अगर सामने से ना देखा हो तो जरूर आपने इसे वीडियो या तस्वीरों में देखा होगा। मगर क्या आपने कभी यह सोचा कि ये रेत काली कैसे हो गई।
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अगर आपने अब तक इस बारे में नहीं सोचा तो आज इसका जवाब जान लीजिए कि आखिर कुछ समुद्री तटों की रेत काली क्यों होती हैं?
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बता दें कि काले रंग की रेत बनने की एक बड़ी वजह ज्वालामुखी हैं। इनसे निकलने वाला गर्म लावा ठंडा होकर ठोस चट्टान बन जाता है, जो आगे चलकर रेत में बदल जाता है।
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जब लावा ठंडा होकर चट्टान बन जाता है, तो समुद्र की लहरें, हवा और बारिश धीरे-धीरे उसे तोड़ती हैं। समय के साथ चट्टान के छोटे-छोटे टुकड़े रेत बन जाते हैं।
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ज्वालामुखी की चट्टानों में अक्सर गहरे रंग के खनिज होते हैं। इनमें बेसाल्ट जैसी चट्टानों के कण भी शामिल होते हैं। यही कण रेत को काला या गहरा रंग देते हैं।
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हर काले समुद्र तट की रेत एक जैसी नहीं होती। कहीं इसका रंग गहरा काला होता है, तो कहीं यह स्लेटी या भूरे रंग की दिखती है। इसका रंग वहां मौजूद खनिजों पर निर्भर करता है।
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समुद्र की लहरें चट्टानों को लगातार तोड़ती और रेत को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं। इसी प्रक्रिया से कई जगहों पर काली रेत जमा होकर खूबसूरत समुद्र तट बनाती है।
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आइसलैंड, हवाई और इंडोनेशिया जैसे ज्वालामुखीय इलाकों में ये काली रेत वाले समुद्र तट मिलते हैं। जिन्हें देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
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