खलील जिब्रान के मोटिवेशनल कोट्स (Khalil Zibran Motivational Quotes): खलील जिब्रान ऐसे रचनाकार थे जिन्होंने प्रेम, रिश्तों, आजादी, दुख और जिंदगी के सवालों को बेहद सरल और दार्शनिक अंदाज में लिखा। 1883 में लेबनान के बशारी में जन्मे जिब्रान बाद में अमेरिका चले गए। उन्होंने अरबी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में लिखा और चित्रकार के रूप में भी अपनी पहचान बनाई।
खलील जिब्रान के मोटिवेशनल कोट्स
उनकी सबसे प्रसिद्ध किताब ‘द प्रोफेट’ 1923 में प्रकाशित हुई। इसमें एक काल्पनिक पैगंबर अलमुस्तफा के जरिए प्रेम, विवाह, बच्चों, काम, खुशी, दुख, आजादी और मृत्यु जैसे विषयों पर विचार रखे गए हैं। किताब की खासियत इसकी काव्यात्मक भाषा और जीवन को देखने का मानवीय नजरिया है।
जिब्रान की लेखनी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह बड़ी दार्शनिक बात को भी आम इंसान के अनुभव से जोड़ देते हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम सिर्फ किसी रिश्ते का नाम नहीं, बल्कि इंसान को भीतर से बदलने वाली भावना है। इसी वजह से करीब एक सदी बाद भी उनकी किताबें दुनिया भर के पाठकों को अपनी ओर खींचती हैं। 10 अप्रैल 1931 को न्यूयॉर्क में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी रचनाएं आज भी जिंदगी को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा देती हैं। आइए डालते हैं खलील जिब्रान के मोटिवेशनल कोट्स पर एक नजर:
1. आप बिना प्यार के और आधे-अधूरे मन से काम कर रहे हैं तो बेहतर है की आप उस काम को करना छोड़ दें।
2. तसल्ली के साथ जिन्दगी को मुड़कर देखना ही उसे फिर से जीने जैसा है।
3. यार के बिना जीवन उस वृक्ष की तरह है जिस पर कभी फल नहीं लगते हैं।
4. बीता हुआ कल आज की स्मृति है और आने वाला कल आज का स्वप्न है।
5. यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो उसे जाने दें, क्योंकि यदि वो लौट कर आता हैं तो वो हमेशा से आपका थे। और यदि नहीं लौटता हैं तो कभी आपका नहीं था।
6. दोस्ती एक खूबसूरत जिम्मेदारी है। ये कोई अवसर या मौका नहीं है।
7. एक दोस्त जो बहुत दूर है वो कभी कभी करीब रहने वालों से अधिक नज़दीक होता है। क्या पहाड़ , वहां रहने वालों की अपेक्षा घाटी से गुजरने वालों को कहीं अधिक प्रेरणादायी और स्पष्ठ नहीं दिखता ?
8. जो बीत चूका है वो आज के लिए सुन्दर याद है, लेकिन आने वाला कल आज के लिए किसी हसीं सपने से कम नहीं है।
9. किसी व्यक्ति के दिल और दिमाग को समझने के लिए यह न देखिए की वह क्या हासिल कर चुका है। इस बात की तरफ ध्यान दीजिए की वह क्या हासिल करने की ख्वाहिश रख रहा है।
10. ज्ञान, ज्ञान नहीं रह जाता जब वह इतना अभिमानी हो जाए कि रो भी ना सके, इतना गंभीर हो जाए कि हंस भी ना सके और इतना स्वार्थी हो जाये कि अपने सिवा किसी और का अनुसरण ना कर सके।
