Fareb Shayari in Hindi: इंसान इश्क करता है। यह उसकी फितरत है। किसी का इश्क मुकम्मल होता है तो किसी के हिस्से इश्क में फरेब आता है। फरेब यानि विश्वासघात। कहने को तो यह एक शब्द मात्र है लेकिन इसका असर बहुत अंदर तक नजर आता है। यह इंसाव को भावनात्मक तौर पर तोड़ कर रख देता है। इश्क में फरेब से बिखरा इंसान भले टूट कर संभल जाए लेकिन ये तो हो जाता है कि फिर वह कभी भी किसी पर भी आंख मूंद कर विश्वास करना छोड़ देता है। इसी इश्क में फरेब पर कई शायरों ने एक से बढ़कर एक नज्म लिखी है। आइए पढ़ते हैं इश्क में फरेब पर कुछ चुनिंदा शेर:
इश्क में फरेब पर शायरी हिंदी में
1. आशिक़ हूं प माशूक़-फ़रेबी है मिरा काम
मजनूं को बुरा कहती है लैला मिरे आगे
- मिर्ज़ा ग़ालिब
2. आदमी जान के खाता है मोहब्बत में फ़रेब
ख़ुद-फ़रेबी ही मोहब्बत का सिला हो जैसे
- इक़बाल अज़ीम
3. बच्चे फ़रेब खा के चटाई पे सो गए
इक मां उबालती रही पथर तमाम रात
- अब्दुल माजिद नश्तर जबलपुरी
4. ऐ मुझ को फ़रेब देने वाले
मैं तुझ पे यक़ीन कर चुका हूं
- अतहर नफ़ीस
5. हर दिल-फ़रेब चीज़ नज़र का ग़ुबार है
आंखें हसीन हों तो ख़िज़ां भी बहार है
- अब्दुल हमीद अदम
6. रंग ही से फ़रेब खाते रहें
ख़ुशबुएं आज़माना भूल गए
- अंजुम लुधियानवी
7. जिन का मक़्सद फ़रेब होता है
वो बड़ी सादगी से मिलते हैं
- चमन लाल चमन
8. ढूंढ़ता फिरता है मुझ को क्यूं फ़रेब-ए-रंग-ओ-बू
मैं वहां हूं ख़ुद जहां अपना पता मिलता नहीं
- अब्दुल्लतीफ़ शौक़
9. दूसरों को फ़रेब दे दे कर
हम ने ख़ुद भी फ़रेब खाया है
- ज़की काकोरवी
10. शौक़ कितने फ़रेब देता है
मुस्कुरा कर हमारा नाम न ले
- निसार इटावी
बता दें कि फरेब एक अस्थायी लाभ तो दे सकता है, लेकिन यह लंबे समय में नुकसान ही पहुंचाता है। सच्चाई और ईमानदारी ही वह रास्ता है, जो रिश्तों और समाज को मजबूत बनाता है।
