International Mother Language Day 2026 Theme, History and Significance: आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। यह खास दिन पूरी दुनिया की मातृभाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए समर्पित है। दरअसल आज भी लाखों बच्चे ऐसी भाषा में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिसे वे अपनी मातृभाषा के रूप में नहीं समझते। यह स्थिति सीखने सिखाने के क्रम को पूरी ईमानदारी से पूरा नहीं कर पाती है।
International Mother Language Day 2026: 21 फरवरी को ही क्यों मनाते हैं अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस, क्या है इस साल की थीम (Photo Source: Freepik)
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुरुआत कैसे हुई थी?
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ( यूनेस्को ) के महासभा सम्मेलन द्वारा नवंबर 1999 में की गई थी। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का विचार बांग्लादेश की पहल थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2002 के अपने प्रस्ताव में इस दिवस की घोषणा का स्वागत किया।
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2026 की थीम क्या है
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2026 की थीम - बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज (Youth voices on multilingualism) है। यह थीम शिक्षा, संस्कृति और समाज में भागीदारी के लिए मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए, युवाओं की भूमिका पर जोर देती है और समावेशी शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देती है।
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी को क्यों मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का विचार 21 फरवरी, 1952 को बंगाली भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष से उपजा था। बांग्लादेशियों के संघर्ष को मान्यता देते हुए 1999 में भाषाई विविधता और बहुभाषिकता को बढ़ावा देने के लिये UNESCO ने 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2002 में इसका समर्थन किया तथा वर्ष 2007 में सभी भाषाओं के संरक्षण के लिये वैश्विक प्रयास करने का आग्रह किया।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का महत्व
भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देना। बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहित करना और मातृभाषा में शिक्षण को सुदृढ़ करना। स्वदेशी भाषाओं और भाषाई अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना। संस्कृति और भाषाई विविधता का सम्मान बढ़ाना।
भाषाई विविधता: आंकड़े क्या बताते हैं?
दुनिया भाषाओं की एक जीवित विरासत है। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर करीब 8,300 से अधिक भाषाएं अस्तित्व में हैं। हालांकि, वैश्वीकरण, शहरीकरण और बदलती सामाजिक संरचनाओं के कारण इनमें से बड़ी संख्या विलुप्ति के खतरे से जूझ रही है।
यूनेस्को के अनुसार, विश्व में लगभग 7,000 भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन औपचारिक शिक्षा में केवल लगभग 351 भाषाओं का ही उपयोग होता है। इसका अर्थ है कि लाखों बच्चे ऐसी भाषा में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिसे वे अपनी मातृभाषा के रूप में नहीं समझते। यह स्थिति सीखने की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
