बच्चे को ना कहना मुश्किल लगता है? ऐसे रखें अपनी बात, बिना डांट-फटकार के होगा काम

सही तरीके से कही गई ‘ना’ उसे यह सीख देती है कि निराश होना जिंदगी का हिस्सा है और थोड़ी देर परेशान होने के बाद भी खुद को संभालकर आगे बढ़ा जा सकता है।

बहुत से पेरेंट्स की समस्या है कि बच्चों को किसी चीज के लिए ना या मना करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। दरअसल कई बार ना सुनने के बाद बच्चा रोने लगता है, गुस्सा करता है या जिद पकड़ लेता है तो कई माता-पिता अपना फैसला बदल देते हैं। लगता है कि बच्चे को परेशान करने से अच्छा है कि उसकी बात मान ली जाए। ये भूल जाते हैं कि हर बार बच्चे की नाराजगी से बचने के लिए ‘ना’ को ‘हां’ में बदल देना सही तरीका नहीं है। बच्चों के लिए सीमाएं तय करना उनके भावनात्मक विकास का भी हिस्सा है।

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बच्चों संग बहस से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके, जानिए कैसे कॉन्फिडेंटली और प्यार से कहें No (Photo: iStock)

बच्चे का नाराज होना हमेशा गलत नहीं

बच्चे का ‘नहीं’ सुनकर दुखी या नाराज होना स्वाभाविक है। शोध बताते हैं कि बच्चों को उचित सीमाओं का अनुभव होने से वे धीरे-धीरे निराशा और अपनी भावनाओं को संभालना सीखते हैं। भावनात्मक नियंत्रण का मतलब यह नहीं कि बच्चा कभी गुस्सा या दुख महसूस न करे। इसका मतलब है कि वह इन भावनाओं को समझे और समय के साथ उन्हें संभालना सीखे।

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