Shringar benefits for women in hindi: भारतीय संस्कृति में महिलाओं का श्रृंगार हमेशा से खास महत्व रखता है। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ सुंदर दिखने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसके पीछे सेहत से जुड़ी गहरी सोच बताई गई है। आयुर्वेदिक डॉक्टर और हेल्थ इंफ्लुएंसर डॉ. दीक्षा भावसार के अनुसार महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ का सीधा संबंध नर्वस सिस्टम, शरीर की गर्मी और अपान वायु के संतुलन से होता है। अपान वायु शरीर की वह ऊर्जा है जो मासिक धर्म और प्रजनन संतुलन को नियंत्रित करती है। पुराने समय में जो पारंपरिक श्रृंगार अपनाए जाते थे, वे इसी संतुलन को बनाए रखने में मदद करते थे। बिंदी, काजल, चूड़ियां, सोना-चांदी के गहने और सिंदूर जैसी चीजें शरीर के खास ऊर्जा बिंदुओं पर असर डालती हैं और मानसिक व हार्मोनल संतुलन को सपोर्ट कर सकती हैं।
श्रृंगार करना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी
कुमकुम बिंदी
माथे पर लगाई जाने वाली कुमकुम बिंदी सिर्फ चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने का काम नहीं करती। आयुर्वेद के अनुसार इसे माथे के उस हिस्से पर लगाया जाता है जिसे अजना रीजन कहा जाता है। यह जगह मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन से जुड़ी मानी जाती है। इस बिंदु पर हल्का दबाव या स्पर्श नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद कर सकता है। इससे तनाव कम होता है और भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी कम हो सकते हैं। जब तनाव कम रहता है तो महिलाओं का मासिक धर्म चक्र भी बेहतर तरीके से संतुलित रह सकता है।
काजल
पारंपरिक काजल को आयुर्वेद में ठंडक देने वाला माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार आंखों का सीधा संबंध पित्त दोष से होता है। जब आंखों को ठंडक मिलती है, तो शरीर में पित्त का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और मासिक धर्म से पहले होने वाली शरीर की गर्मी जैसी परेशानियां कम हो सकती हैं। इसलिए पहले के समय में घर पर बना काजल इस्तेमाल करना आम बात थी।
मोती के गहने
मोती को प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाला माना जाता है। आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार मोती के गहने पहनने से शरीर और मन को शांत रखने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर उन महिलाओं के लिए यह उपयोगी माना जाता है जिन्हें पीएमएस, भावनात्मक संवेदनशीलता या मूड स्विंग जैसी समस्याएं होती हैं। मोती की ठंडी प्रकृति शरीर की अतिरिक्त गर्मी को संतुलित करने में सहायक हो सकती है।
चूड़ियां
हाथों में पहनी जाने वाली चूड़ियां भी पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य से जुड़ी मानी जाती हैं। जब चूड़ियां कलाई से टकराती हैं तो वहां हल्का कंपन और दबाव पैदा होता है। आयुर्वेदिक सोच के अनुसार इससे रक्त संचार बेहतर हो सकता है और शरीर की ऊर्जा का प्रवाह भी संतुलित रहता है। यही वजह है कि पहले के समय में महिलाओं के लिए चूड़ियां पहनना रोजमर्रा की आदत का हिस्सा हुआ करता था।
चांदी के गहने
आयुर्वेद में चांदी को ठंडक देने वाला धातु माना जाता है। खासकर नाभि के नीचे पहने जाने वाले चांदी के गहनों को शरीर को ठंडक देने और स्थिरता देने वाला माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही भारी ब्लीडिंग या ज्यादा पीएमएस जैसी समस्याओं में भी यह सहायक माने जाते हैं।
सोने के गहने और नथ
सोना पारंपरिक रूप से ताकत, ऊर्जा और पोषण का प्रतीक माना जाता है। आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार नाभि के ऊपर पहने जाने वाले सोने के गहने शरीर की ऊर्जा और मजबूती को सपोर्ट करते हैं। वहीं नथ या नोज रिंग को महिलाओं की प्रजनन ऊर्जा से जुड़े चैनलों से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि यह शरीर की ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकती है।
असल में देखा जाए तो हमारे पारंपरिक श्रृंगार में सिर्फ सुंदरता ही नहीं, बल्कि सेहत की समझ भी शामिल थी। दादी-नानी इन आदतों को रोज अपनाती थीं और अनजाने में ही अपने शरीर के हार्मोनल संतुलन का ख्याल भी रखती थीं।
