हरिवंश राय बच्चन: मिट्टी का तन, मस्ती का मन, क्षणभर जीवन मेरा परिचय

Harivansh Rai Bachhcan Jayanti: हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के उन महान कवियों में शामिल हैं जिन्होंने शब्दों को नई आत्मा दी। उनकी कालजयी कविता मधुशाला आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही ताजगी से बहती है जितनी उसके लिखे जाने के समय बहती थी। बच्चन की रचनाओं में जीवन का दर्शन, प्रेम की गहराई, दर्द की सादगी और आनंद की मधुरता, सब एक साथ मिलते हैं। वे छायावाद के बाद की काव्यधारा के प्रमुख स्तंभ थे। सरल, संगीतात्मक और सहज भाषा उनका सबसे बड़ा गुण था।

Harivansh Rai Bachhcan Birth Anniversary: हिंदी कविता में हरिवंश राय 'बच्चन' के एटीट्यूड और फिलॉसफी का हर कोई कायल है। उन्होंने कविता से संवेदनाओं के साथ ही जिंदगी की सच्चाई से दुनिया को रूबरू कराया। उनका परिचय इतना ही है - मिट्टी का तन, मस्ती का मन, क्षणभर जीवन मेरा परिचय। हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर 1907 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। उन्हें घरवाले प्यार से 'बच्चन' कहते थे। अपनी कालजयी रचना 'मधुशाला' में उन्होंने खुद की परवरिश के बारे में लिखा था -

Harivansh Rai Bachchan

हरिवंश राय बच्चन जयंती 2025 (Photo: Wikipedia)

मैं कायस्थ कुलोदभव,

मेरे पुरखों ने इतना ढाला,

मेरे तन के लोहू में है,

पचहत्तर प्रतिशत हाला,

पुश्तैनी अधिकार मुझे है,

मदिरालय के आंगन पर,

मेरे दादों-परदादों के हाथ,

बिकी थी मधुशाला।

दरअसल, अपनी कविताओं और लेखनी से वो कम समय में ही दुनियाभर में जाना-पहचाना नाम बन गए थे। इलाहाबाद में रहते हुए उनकी लेखनी में मानवीय संवेदनाएं झलकने लगी थीं। आधी से ज्यादा जिंदगी किराए के मकान में गुजारने वाले 'बच्चन' लोगों की तकलीफों को अपने शब्दों में उतारते थे। 1929 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद एमए में एडमिशन लिया, लेकिन 1930 के असहयोग आंदोलन के चलते पढ़ाई बीच में छोड़ दी। 1938 में एमए करने के बाद कैम्ब्रिज चले गए।

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