Good Morning Shayari on Hair: मशहूर शायरों ने ज़ुल्फों की ख़ूबसूरती बयां करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। शायरी की ज़ुबान में ज़ुल्फों को घटा कहा गया है। किसी शायर ने जुल्फों को बादल कह दिया तो किसी ने जानलेवा खंजर। सबके अपने अपने अंदाज हैं। मिर्जा गालिब से लेकर मीर तकी मीर और जौन एलिया तक ने बालों की प्रशंसा करते हुए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है कि प्रेमिका अपना दिल हार बैठे। आज पढ़ें ज़ुल्फों की खूबसूरती बयां करते ये शेर-
Shayari on Hair
जुल्फों पर शायरी
गई थी कह के मैं लाती हूं ज़ुल्फ़-ए-यार की बू
फिरी तो बाद-ए-सबा का दिमाग़ भी न मिला
-जलाल लखनवी
देखी थी एक रात तिरी ज़ुल्फ़ ख़्वाब में
फिर जब तलक जिया मैं परेशान ही रहा
-रज़ा अज़ीमाबादी
तेरे धोके में किसी और के शाने लग जाएं
सब के जैसी न बना ज़ुल्फ़ कि हम सादा-निगाह
तेरे धोके में किसी और के शाने लग जाएं
-फ़रहत एहसास
फिर याद बहुत आएगी ज़ुल्फ़ों की
फिर याद बहुत आएगी ज़ुल्फ़ों की घनी शाम
जब धूप में साया कोई सर पर न मिलेगा
-बशीर बद्र
नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं
तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशां हो गईं
-मिर्ज़ा ग़ालिब
बिखरी हुई हो ज़ुल्फ़ भी
किसी के हो रहो अच्छी नहीं ये आज़ादी
किसी की ज़ुल्फ़ से लाज़िम है सिलसिला दिल का
-यगाना चंगेज़ी
अपने सर इक बला तो लेनी थी
मैं ने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है
-जौन एलिया
हम हुए तुम हुए कि 'मीर' हुए
उस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए
-मीर तक़ी मीर
बिखरी हुई हो ज़ुल्फ़ भी इस चश्म-ए-मस्त पर
हल्का सा अब्र भी सर-ए-मय-ख़ाना चाहिए
-अज्ञात
गेसू रुख़ पर हवा से हिलते हैं
चलिए अब दोनों वक़्त मिलते हैं
-मिर्ज़ा शौक़ लखनवी
