Gantantra Diwas Par Shapath, भारत मेरा देश है प्रतिज्ञा: हम सब भारतवासी भाई-बहन है.. क्या है गणतंत्र दिवस की प्रतिज्ञा? चंद लाइन्स में लिखित है देश सेवा की कसम, जानें National Pledge Lyrics हिंदी में

Gantantra Diwas Par Shapath (भारत मेरा देश है प्रतिज्ञा लिखी हुई ) National Pledge in Hindi, Republic Day Pledge Wikipedia Text: भारत हमारा देश और हम सब भारतवासी भाई-बहन है.. आपने भी स्कूल में ये प्रतिज्ञा जरूर ली होगी। ये असल में भारतीय राष्ट्रीय प्रतिज्ञा है जो भारत के लोगों से देश के प्रति वफादारी की शपथ लेने का एक तरीका है। यहां पर आप इसी राष्ट्रीय प्रतिज्ञा के पूरे लिरिक्स हिंदी में देख सकते हैं।

Gantantra Diwas Par Shapath (भारत मेरा देश है प्रतिज्ञा लिखी हुई ) National Pledge in Hindi, Republic Day Pledge Wikipedia Text: गणतंत्र दिवस के दिन नजदीक हैं। इस दिन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी बीच लोगों को अपने राष्ट्रीय प्रतिज्ञा की भी याद आ रही है। ये वही प्रतिज्ञा है जो आपकी स्कूल की किताबों पर छपा रहता है। इसका स्कूलों में बच्चों को रोज पाठ कराया जाता है। वहीं, किसी बड़े समारोह, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर भी इसे पढ़ा जाता है। आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं और साथ ही देखते हैं इसके हिंदी लिरिक्स (राष्ट्रीय प्रतिज्ञा के बोल)।

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कौन हैं राष्ट्रीय प्रतिज्ञा के लेखक?

राष्ट्रीय प्रतिज्ञा या शपथ मूल रूप से तेलुगु भाषा में लिखी गई थी। इसके लेखक पीडिमर्री वेंकट सुब्बा राव थे। सन् 1962 में विशाखापत्तनम के जिला कोषागार अधिकारी के रूप में काम करते सुब्बा राव जी ने इसे लिखा था। बाद में उन्होंने इसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता तेनेटी विश्वनाथम से सामने प्रस्तुत किया, जिन्होंने राष्ट्रीय प्रतिज्ञा को तत्कालीन शिक्षा मंत्री पीवीजी राजू के पास भेज दिया। इसे पहली बार सन् 1963 में विशाखापत्तनम के एक स्कूल में पढ़ा गया और बाद में उस साल कई दूसरे स्कूलों में भी इसे पढ़ाया गया। बाद में इसका अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया गया। सन् 1964 में बैंगलोर में अपने अध्यक्ष एमसी चागला के नेतृत्व में शिक्षा पर केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक में निर्देश दिया गया कि शपथ को स्कूलों में पढ़ा जाना चाहिए और यह प्रथा अगले गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1965 तक शुरू की जानी चाहिए। कहते हैं कि सुब्बा राव को इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि यह राष्ट्रीय शपथ है। कहा जाता है कि उन्हें इस बात का पता तब चला जब उनकी पोती अपनी किताब में इस शपथ को पढ़ रही थी।

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