पहली क्लास के टॉपर्स की मार्कशीट पर छिड़ी बहस, ये बड़ी तैयारी का तरीका या इमोशनल टॉर्चर

First Class Toppers: कर्नाटक के एक स्कूल ने जारी की पहली क्लास की टॉपर लिस्ट ने लोगों को चौंका दिया है। अब लोगों के बीच बहस छिड़ गई है कि क्या ऐसे बच्चों का बचपन छीना जा रहा है।

First Class Toppers: हाल ही में कर्नाटक के एक स्कूल की कक्षा 1 के छात्रों की टॉपर लिस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इसकी वजह नन्हे बच्चों के असाधारण अंक थे। किसी बच्चे ने 99%, तो किसी ने लगभग हर विषय में पूरे नंबर हासिल किए थे। इंटरनेट पर जैसे ही यह सूची सामने आई, लोगों के बीच तगड़ी बहस शुरू हो गई। कुछ लोग बच्चों की मेहनत और स्कूल की शिक्षा प्रणाली की तारीफ करने लगे, तो कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या इतनी छोटी उम्र में बच्चों पर जरूरत से ज्यादा पढ़ाई का दबाव डाला जा रहा है? क्या पहली कक्षा के बच्चे अब खेल, कहानियों और कल्पनाओं की दुनिया से निकलकर सीधे ‘परफॉर्मेंस’ और ‘रैंक’ की दुनिया में पहुंच गए हैं? यही सवाल आज देशभर के लाखों माता-पिता और शिक्षकों के सामने खड़ा है। आइए जानते हैं कैसे नंबर्स की दौड़ में पिछड़ रहा बचपन का मजा?

First Class Toppers

पहली क्लास के टॉपर्स की लिस्ट

कैसे बदल रहा बचपन का मतलब?

एक समय था जब पहली कक्षा का मतलब रंग भरना, कविता सुनाना, दोस्त बनाना और खेल-खेल में सीखना होता था। लेकिन आज बदलते दौर में तस्वीर काफी बदल चुकी है। अब कई स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए भी टेस्ट, रैंकिंग, होमवर्क और परफॉर्मेंस रिपोर्ट बेहद गंभीर विषय बन गए हैं। बच्चे स्कूल से लौटने के बाद ट्यूशन, एक्टिविटी क्लास और असाइनमेंट में व्यस्त दिखाई देते हैं।

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