Fanaa Shayari in Hindi: इश्क में फना हो जाना सिर्फ मिट जाना नहीं होता, यह इश्क की आखिरी हद है। इस मुकाम पर आशिक खुद को अपने महबूब या खुदा में इस कदर मिटा देता है कि उसका वजूद तक नहीं बचता। यह मिटना हार नहीं बल्कि सबसे बड़ा हासिल है। फना का मतलब है अपने अहंकार, अपनी इच्छाओं और अपने अस्तित्व को प्रेम या भक्ति के रंग में इस तरह डुबो देना कि अब सिर्फ महबूब या परमात्मा ही बचे। इसी फना पर बहुत से शायरों ने एक से बढ़कर एक खूबसूरत शेर गढ़े हैं। आइए डालते हैं फना पर लिखे चंद मशहूर शेरों पर एक नजर:
इश्क में फना शायरी (Photo: iStock)
1. इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
- मिर्ज़ा ग़ालिब
2. मैं चाहता हूं मोहब्बत मुझे फ़ना कर दे
फ़ना भी ऐसा कि जिस की कोई मिसाल न हो
- जव्वाद शैख़
3. सारी गली सुनसान पड़ी थी बाद-ए-फ़ना के पहरे में
हिज्र के दालान और आँगन में बस इक साया ज़िंदा था
- जौन एलिया
4. मुझे तुम्हारे तग़ाफ़ुल से क्यूं शिकायत हो
मिरी फ़ना मिरे एहसास का तक़ाज़ा है
- साहिर लुधियानवी
5. अव्वल ओ आख़िर फ़ना बातिन ओ ज़ाहिर फ़ना
नक़्श-ए-कुहन हो कि नौ मंज़िल-ए-आख़िर फ़ना
- अल्लामा इक़बाल
6. फ़ना-फ़िल-इश्क़ होना चाहते थे
मगर फ़ुर्सत न थी कार-ए-जहां से
- परवीन शाकिर
7. राहत के महलों को बला पूछ रही है
हस्ती के मकानों को फ़ना पूछ रही है
- मिर्ज़ा सलामत अली दबीर
8. मैं वो फ़तादा हूं कि बग़ैर-अज़-फ़ना मुझे
नक़्श-ए-क़दम की तरह न कोई उठा सके
- ख़्वाजा मीर दर्द
9. जैसे फ़ना बक़ा में भी कोई कमी सी हो
मुझ को पड़ी है तेरी ज़रूरत कहाँ कहाँ
- फ़िराक़ गोरखपुरी
10. कितने पुर-उम्मीद कितने ख़ूबसूरत हैं ये लोग
क्या ये सब बाज़ू ये सब चेहरे फ़ना हो जाएंगे
- अहमद मुश्ताक़
उम्मीद करते हैं कि आपको ये शेर जरूर पसंद आए होंगे। आप मशहूर शायरों की कलम से निकले इन खूबसूरत शेर को अपने किसी बेहद खास के दिल तक पहुंचा सकते हैं।
