Urgency Culture: आपके दिमाग को खोखला कर रहा है अरजेंसी कल्चर, एक्सपर्ट्स से जानें इस कल्चर के लक्षण, साइड इफेक्ट्स और बचाव के सटीक तरीके

Urgency Culture: क्या आप आधी रात में नींद खुलने पर व्हाट्सअप चेक करते हैं? क्या आपको हर काम सबसे पहले करने की हड़बड़ी रहती है? क्या आप अपने पार्टनर के रिप्लाई नहीं आने पर परेशान हो जाते हैं? ये सारे लक्षण अरजेंसी कल्चर के हैं। अब अरजेंसी कल्चर क्या है और इसका हमारे ऑफिस, रिलेशनशिप और दिमाग पर कैसे असर होता है, इन सबके बारे में आज हम आपको विस्तार से बताएंगे। साथ ही जानेंगे एक्सपर्ट्स की राय।

Urgency Culture: काल करे सो आज कर, आज करे सो अब... ये कबीर दास जी के बोल हैं, लेकिन आजकल के दौर ने तो इस दोहे का मतलब ही बदलकर रख दिया है। हर शख्स एक रेस में भाग रहा है। ऑफिस में काम जल्दी करने की रेस, सोशल मीडिया पर आगे निकलने की रेस, परफेक्ट पार्टनर ढूंढने की रेस.. ये दौड़ शायद ही खत्म हो। पर क्या कभी आपने सोचा है कि इस रेस का रिजल्ट क्या होगा? जरा ठहरिए और सोचिए। ऑफिस के जिस काम को आप सोमवार तक कर सकते हैं, उसे वीकेंड पर पूरा करने की जल्दी क्यों है? परिवार को वक्त देने की बजाय हर 1 मिनट पर फोन पर आया मैसेज क्यों देखते हैं? आधी रात में भी नींद खुल जाए तो इंस्ट्राग्राम (Instagram) या फेसबुक क्यों चेक करते हैं? दरअसल, गलती आपकी नहीं है। ये प्रभाव है 'अरजेंसी कल्चर' (Urgency Culture) का। ये कोई शारीरिक बीमारी नहीं है, ये असल में हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक ऐसा हिस्सा बन गया है जो हमारे ही दिल और दिमाग को खोखला बना रहा है। आज हम आपको अरजेंसी कल्चर और इसके लक्षण, इफेक्ट्स (Effects Of Urgency Culture) और बचाव के बारे में डिटेल में जानकारी देंगे और इसी के साथ एक्सपर्ट्स (Experts On Urgency Culture) की राय भी बताएंगे।

Explained What Is Urgency Culture At Workplace In Relationship Leads To Burnout Quick Tips To Escape Urgency Culture In Hindi

ऑफिस में बढ़ रहा है अरजेंसी कल्चर का प्रभाव

अगर आप और आपकी टीम काम को लेकर हमेशा तनाव महसूस करते हैं तो ये अरजेंसी कल्चर (Urgency Culture At Workplace) का प्रभाव हो सकता है। इतना ही नहीं, अगर आपके और आपकी टीम के लोगों के पास अपने किसी भी निजी काम को करने के लिए सिर्फ शाम और वीकेंड का ही समय मिलता है तो ये भी इसी के लक्षण हैं। आइये जरा और अच्छे से समझते हैं।

जब ऑफिस में किसी प्रोजेक्ट या टार्गेट की बात आती है तो मान लिजिए आपको सोमवार की डेडलाइन मिली है। ये जानते हुए भी कि उस काम को करने के लिए कम से कम बुधवार तक का समय दिया जा सकता है, कंपनी या बॉस आपको हर काम अर्जेंट बोलकर देते हैं। ऐसा व्यवहार ही ऑफिस के लोगों में निराशा पैदा करता है। जब दिमाग तनाव महसूस करेगा तो अपने आप ही आपकी प्रोडक्टिविटी (Why Urgency Culture In The Workplace Is Failing Everyone) भी कम हो जाएगी। सोचने की झमता पर भी मानो ताला लग जाएगा। Harvard Business Review के एक रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है कि हम सबसे कम समय सीमा वाले कामों को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं, भले ही वो काम जरूरी हों या न हों। तनाव में हम उस चीज पर ध्यान देना भूल जाते हैं जो असल में कहीं ज्यादा जरूरी होती है।

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