Ekta Diwas Hindi Poem: पूरे देश को एकसूत्र में पिरोने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। सरदार पटेल स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री थे और आजादी की लड़ाई में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान भी दिया था। कई रियासतों को मिलाकर उन्होंने अखंड भारत को तैयार किया था। उनके प्रयासों और व्यक्तित्व के कारण उनको लौह पुरुष के नाम से भी जाना जाता है। उनके जन्म दिवस को एकता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस अवसर पर पढ़ें एक खास कविता।
Ekta Diwas Hindi Poem
एकता दिवस पर कविता
देश से बढ़कर कुछ भी नहीं....
कब समझेंगे हम ?
कि दुनिया के सबसे खूबसूरत मुल्क के,
सबसे खुशनसीब वाशिंदे हैं हम,
जहां होती हैं- षड्ऋतुएँ,
जहाँ हर नदी है माँ का ही रूप,
और जहाँ बोली जाती हैं, सबसे अधिक भाषाएँ,
और फिर भी बंधा है, पूरा देश एक सूत्र से,
कितनी कुरबानियाँ हुईं,
इस देश को फिर से आज़ाद कराने के लिए,
लेकिन फैला है,
चहुँ ओर कुहासा सा,
क्या हमारी प्राथमिकता में, कहीं भी, देश है ?
क्या कभी सामान्य वार्तालाप में होती हैं,
चिन्ता, देश के भविष्य की ?
क्या, कभी, पड़ती हैं सलवटें, माथे पर,
समाज के चारित्रिक व नैतिक पतन पर ?
धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र के नाम पर,
बाँट दिया है देश को,
अदृश्य अगणित खण्डों में,
कोई भी व्यक्ति, मज़हब,
देश से ऊपर नहीं,
जागिए, क्योंकि अब भी नहीं जागे,
तो नहीं करेगा इतिहास हमें कभी माफ़,
सैकड़ों टुकड़ों को जोड़कर,
बनाया जिसने ये अखण्ड भारत,
आईए, उसे दें सच्ची श्रृद्धांजलि,
अपने भारत को अखण्ड बनाए रखने के लिए,
मिटाएँ मतभेदों को,
रखना ही होगा हमें देश को सबसे ऊपर,
यहाँ तक कि स्वयं से भी ऊपर,
एक होकर इस एकता को इतना मजबूत बनाएँ,
कि कोई भी दुश्मन ना डाल सके,
बुरी नज़र इस देश पर,
याद रखिए- देश से बढ़कर कुछ भी नहीं,
ना कोई मज़हब, ना कोई पंथ, ना कोई दल...
राष्ट्र की एकता और अखण्डता ही है,
एकमात्र उद्देश्य, एकमात्र धर्म, एकमात्र कर्म ।।”
- डॉ. श्याम सुन्दर पाठक ‘अनन्त’
(कवि एक प्रसिद्ध लेखक, मोटीवेशनल स्पीकर व पेशे से सहायक आयुक्त, जी.एस.टी. उत्तर प्रदेश के पद पर कार्यरत हैं )
