कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय: मिट्टी और ममता की महक में डूबे छठ गीत

Chhath Puja 2025: छठ का व्रत सिर्फ नियमों और कठोर संकल्प का ही नहीं बल्कि संवाद का पर्व है। प्रकृति से संवाद, पूर्वजों से संवाद और अंततः उस अदृश्य शक्ति से संवाद जिसे लोग सूर्य कहते हैं पर महसूस मातृभाव की तरह करते हैं।

लोकपर्व छठ अब ग्लोबल हो गया है। बिहार या पूर्वांचल के लोग दुनिया के जिस भी कोने में बसे हैं बड़े शान और सम्मान से छठी मईया को पूजते हैं। पर्व की आहट के साथ ही गांवों की पगडंडियां, तालाबों के किनारे, मिट्टी के आंगन और नदी के घाट किसी अनदेखे सुर से भर उठते हैं।

Chhath Puja Songs

छठ पूजा के गीत (Photo: iStock)

यहां कोई शोर नहीं होता, न ही माइक पर चढ़ा लाउडस्पीकर। यहां होती है मांओं और बहनों की धीमी, गहरी, आत्मा तक उतर जाने वाली लोकधुन— “केरवा से फलेला घेवद से…”। इन गीतों में न देवता का कोई औपचारिक नाम होता है, न वेद-मंत्रों का वैभव, लेकिन फिर भी इनमें एक पूरा ब्रह्मांड बसता है: जल, जंगल, जड़, जन और जननी। छठ के ये लोकगीत उस भाव का परिचय हैं जहां पूजा शब्दों से नहीं, सुरों से होती है।

End of Feed