Best Sleep Time For Blood Sugar Control: आजकल ज्यादातर लोग या तो बहुत कम सोते हैं या फिर छुट्टी के दिन ज्यादा देर तक सोकर नींद पूरी करने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी नींद का समय सीधे ब्लड शुगर से जुड़ा हो सकता है? हाल ही में आई एक स्टडी ने इस बारे में दिलचस्प जानकारी दी है। रिसर्च के मुताबिक नींद की अवधि का शरीर के मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन के काम करने के तरीके से गहरा संबंध होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि न बहुत कम और न ही बहुत ज्यादा सोना सही है। अगर आप रोज लगभग 7 घंटे 18 मिनट सोते हैं तो यह ब्लड शुगर को संतुलित रखने के लिए सबसे बेहतर समय हो सकता है। आइए समझते हैं कि इस स्टडी में क्या सामने आया और नींद का ब्लड शुगर से क्या रिश्ता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए सोने का आदर्श समय
7 घंटे 18 मिनट की नींद क्यों मानी गई सबसे बेहतर
एक नई रिसर्च में पाया गया कि रोज करीब 7 घंटे 18 मिनट की नींद ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए सबसे सही मानी जा सकती है। इस स्टडी में हजारों लोगों के स्लीप पैटर्न और उनके ब्लड शुगर से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिसर्चर्स ने पाया कि नींद और ब्लड शुगर के बीच एक तरह का U-shape संबंध होता है। यानी अगर नींद बहुत कम हो या बहुत ज्यादा हो, दोनों ही स्थिति में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। जबकि लगभग 7 घंटे 18 मिनट की नींद इस जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
कम सोने से क्यों बिगड़ सकता है ब्लड शुगर
अगर कोई व्यक्ति रोज पर्याप्त नींद नहीं लेता, तो इसका असर शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है। नींद की कमी से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकते हैं, जिससे इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता। जब ऐसा होता है तो शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है और धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है। यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को भी बढ़ा सकती है।
ज्यादा सोना भी क्यों हो सकता है नुकसानदायक
कई लोगों को लगता है कि ज्यादा सोना शरीर के लिए अच्छा होता है, लेकिन यह हमेशा सही नहीं है। स्टडी में यह भी पाया गया कि जरूरत से ज्यादा सोना भी मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है। खासकर अगर कोई व्यक्ति पहले से पर्याप्त नींद ले रहा है और फिर भी छुट्टी के दिन बहुत ज्यादा सोता है, तो इससे इंसुलिन संवेदनशीलता कम हो सकती है और ब्लड शुगर नियंत्रण पर असर पड़ सकता है।
वीकेंड में ज्यादा सोकर नींद पूरी करना सही है या नहीं
आजकल कई लोग वीकेंड पर देर तक सोकर पूरी हफ्ते की नींद पूरी करने की कोशिश करते हैं। लेकिन स्टडी के मुताबिक यह तरीका हर किसी के लिए सही नहीं है। अगर किसी व्यक्ति की हफ्ते भर की नींद कम रहती है, तो वीकेंड पर 1-2 घंटे ज्यादा सोना थोड़ी मदद कर सकता है। लेकिन जो लोग पहले से पर्याप्त नींद ले रहे हैं, उनके लिए वीकेंड पर ज्यादा सोना उल्टा नुकसान भी पहुंचा सकता है।
नींद और मेटाबॉलिज्म का गहरा रिश्ता
वैज्ञानिकों का कहना है कि नींद और मेटाबॉलिज्म के बीच दोतरफा संबंध होता है। खराब नींद ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकती है, और अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक ज्यादा रहे तो वह भी नींद के पैटर्न को बिगाड़ सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ नियमित और संतुलित नींद को हेल्दी लाइफस्टाइल का जरूरी हिस्सा मानते हैं। रोज एक ही समय पर सोना और उठना, स्क्रीन टाइम कम करना और पर्याप्त नींद लेना ब्लड शुगर नियंत्रण के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
निष्कर्ष
स्टडी बताती है कि अच्छी सेहत के लिए सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि सही नींद भी उतनी ही जरूरी है। बहुत कम या बहुत ज्यादा सोना दोनों ही शरीर के मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर पर असर डाल सकते हैं। इसलिए कोशिश करें कि रोज लगभग 7 घंटे से थोड़ा ज्यादा यानी करीब 7 घंटे 18 मिनट की नियमित और अच्छी नींद लें, ताकि शरीर का संतुलन बना रहे और डायबिटीज जैसे जोखिम कम हो सकें।
