बेस्ट शायरी हिंदी में 2 लाइन: शायरी की दुनिया में एक से बढ़कर एक शायर मशहूर हुए हैं। हर शायर अपने आप में अलग है। हर किसी की अंदाज-ए-बयां जुदा है। हर किसी ने शब्दों को अपने तरीके के धागे में पिरोया और शायरी की शक्ल में सुनने पढ़ने वालों के सामने पेश किया। इन शायरों की कलम में वो ताकत होती है कि शेर सुनने वालों को लगता है कि ये तो उनके लिए ही खास लिखा गया है। अब आते हैं इस सवाल पर कि दुनिया का सबसे अच्छा शायर कौन है और किस शेर को कहते हैं दुनिया की नंबर 1 शायरी।
मिर्जा गालिब की सबसे मशहूर शायरी
दुनिया में नंबर 1 शायरी कौन है?
सबसे पहले तो ये जान लिजिए कि दुनिया में किसी एक शायरी को आधिकारिक तौर पर 'नंबर 1' घोषित करना मुश्किल है क्योंकि शायरी व्यक्तिगत पसंद का विषय है। जिस तरह से किसी की खूबसूरती देखने वाले की नजर में होती है उसी तरह से किसी भी शेर की शोहरत पढ़ने-सुनने वाले की पसंद पर निर्भर करती है।
फिर भी सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली शायरी की बात करें तो उर्दू शायरी में मिर्जा गालिब को सबसे महान और लोकप्रिय शायर माना जाता है। सदियां बीत गईं लेकिन उनका लिखा आज भी प्रासंगिक हैं। उनके शेर ऐसे हैं जो आज के हालात पर भी बेहद सटीक बैठते हैं।
जब बात दुनिया के सबसे मशहूर शेर की बात करते हैं तो गालिब के एक शेर की चर्चा जरूर होती है। यह शेर है-
इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना, दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
क्या है मिर्जा गालिब के सबसे मशहूर शेर का मतलब
यह मशहूर शेर फना, दर्द और समर्पण की नायाब सूफियाना समझ को बयान करता है। शेर का पहला मिसरा है - इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना। मतलब कि एक बूंद की असली खुशी अपने अलग अस्तित्व को मिटाकर दरिया में मिल जाने में है। यहां कतरा इंसान की ‘मैं’ है, उसका अहंकार, उसकी अलग पहचान; और दरिया उस विराट सत्य, प्रेम या ईश्वर का प्रतीक है। जब बूंद दरिया में मिलती है तो मिटती नहीं, बल्कि व्यापक हो जाती है।
दूसरा मिसरा है - दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना। गालिब कहते हैं कि जब दर्द अपनी चरम सीमा पार कर जाता है, तो वही दर्द इलाज बन जाता है। यानी पीड़ा इंसान को तोड़ती नहीं, उसे बदलती है। लगातार दुख से गुजरकर व्यक्ति एक ऐसी समझ और परिपक्वता पा लेता है जहां वही दर्द उसे मजबूत कर देता है।
गालिब इस शेर के जरिए कहना चाहते हैं कि जीवन का असली सौंदर्य मिटने और सहने में छिपा है। अहंकार का फना होना विस्तार है और दर्द का चरम पर जाना ही दवा है। एक शब्द में कहें तो खोना ही पाना है और यही इस शेर की रूह है।
