बामा काली नृत्य: जब मशालों की रोशनी में नाचने लगती हैं 'मां काली', ढाक की थाप पर झूम उठता है पूरा शहर

प्रतिमा को कंधे पर उठाकर भक्तों की भीड़ नाचती है। बांस का मंच ऊपर-नीचे होता है। विशाल प्रतिमा भी उसी लय में हिलती है। दूर से देखने पर लगता है, जैसे मां काली खुद नृत्य कर रही हों।

Bama Kali Dance: दीवाली की रात जब पूरा देश रोशनी की चादर लपेट पटाखों के शोर से सराबोर रहता है, तब पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के शांतिपुर में कुछ अलग ही माहौल देखने को मिलता है। गलियों में लोगों की भीड़ जुटने लगती है। ढाक की आवाज दूर से सुनाई देने लगती है। कुछ देर बाद मशालों की रोशनी के बीच मां काली की एक विशाल प्रतिमा दिखाई देती है। यह प्रतिमा स्थिर नहीं रहती है.. नाचती है, और उसे नचाते हैं मां के भक्त।

Bama Kali Dance

कब, क्यों और कैसे होता है बामा काली नृत्य (AI generated and newsroom verified image)

इस नजारे को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग शांतिपुर पहुंचते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस अनोखे नृत्य के वीडियो खूब वायरल होते हैं। इसे बामा काली नृत्य कहा जाता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यहां देवी की प्रतिमा को भक्त अपने कंधों पर उठाकर ढाक की थाप पर झुमाते और नचाते हैं। देखने वालों को लगता है, जैसे प्रतिमा में सचमुच जान आ गई हो।

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