रिश्तों में कहीं आप भी ‘फोन चार्जर’ तो नहीं बन गए? Ankur Warikoo से सीखें रिलेशनशिप का बड़ा सबक

रिश्तों में प्यार दीजिए, समय दीजिए, साथ दीजिए। लेकिन अपने लिए भी कुछ समय बचाकर रखिए। क्योंकि जब इंसान खुद ही पूरी तरह थक जाता है, तो वह लंबे समय तक किसी और का सहारा भी नहीं बन सकता।

आजकल रिश्तों में हम अक्सर एक-दूसरे के लिए समय निकालते हैं, अपनी जरूरतें पीछे रखते हैं और सामने वाले की परेशानियों को अपनी प्राथमिकता बना लेते हैं। ऐसा करना अपने आप में गलत नहीं है। लेकिन परेशानी तब शुरू होती है, जब किसी रिश्ते को निभाते-निभाते इंसान खुद के लिए समय और ऊर्जा बचाना ही भूल जाए।

Ankur Warikoo

रिश्तों में कहीं आप भी ‘फोन चार्जर’ तो नहीं बन गए? (Photo: iStock)

इसी बात को एक बेहद आसान उदाहरण से समझाते हुए उद्यमी और लाइफ कोच अंकुर वारिकू ने हाल ही में रिश्तों को लेकर एक जरूरी बात शेयर की। उन्होंने इसकी तुलना फोन के चार्जर से की। उनका कहना है कि जिस तरह किसी दूसरे का फोन चार्ज करते-करते अपना फोन डिस्चार्ज होने देना समझदारी नहीं है, उसी तरह रिश्तों में भी लगातार दूसरों को अपनी सारी ऊर्जा देते रहना ठीक नहीं।

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