हाल ही में अनंत अंबानी ने तिरुपति बालाजी मंदिर पहुंचकर भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए और परंपरा के अनुसार अपने बाल भी दान किए। उनकी यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इसके बाद कई लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि आखिर तिरुपति बालाजी मंदिर में बाल दान करने की परंपरा क्यों निभाई जाती है। हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा व समर्पण के प्रतीक के रूप में भगवान को अपने बाल अर्पित करते हैं।
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यह केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि भगवान के प्रति समर्पण और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है। कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर भी बाल दान करते हैं, जबकि कुछ इसे जीवन की नई शुरुआत का संकेत मानते हैं। आइए जानते हैं कि तिरुपति बालाजी मंदिर में बाल दान करने की परंपरा कैसे शुरू हुई और इसका धार्मिक महत्व क्या माना जाता है।
तिरुपति में बाल दान क्यों किया जाता है?
हिंदू मान्यताओं के अनुसार बाल इंसान के रूप और अहंकार का प्रतीक माने जाते हैं। जब कोई भक्त अपने बाल भगवान को अर्पित करता है, तो वह यह संदेश देता है कि वह अपना अभिमान छोड़कर पूरी श्रद्धा से ईश्वर की शरण में आया है। इसे भगवान के प्रति समर्पण और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।
मनोकामना पूरी होने पर करते हैं दान
तिरुपति में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं और छोटे बच्चे भी बाल दान करते हैं। बहुत से श्रद्धालु किसी विशेष इच्छा के साथ तिरुपति बालाजी से प्रार्थना करते हैं। जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तब वे धन्यवाद स्वरूप मंदिर में मुंडन करवाकर अपने बाल दान करते हैं। कई परिवार अपने नवजात या छोटे बच्चों का पहला मुंडन भी इसी मंदिर में करवाना शुभ मानते हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर में रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुंडन करवाते हैं।
दान किए गए बालों का क्या होता है?
मंदिर में एकत्र किए गए बालों को सुरक्षित तरीके से अलग किया जाता है। बाद में इन्हें नीलामी के माध्यम से बेचा जाता है। इससे मिलने वाली राशि का उपयोग मंदिर के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सेवा कार्यों में किया जाता है। हर भक्त अपनी भावना के अनुसार इस परंपरा को निभाता है। यही कारण है कि सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी निभाई जाती है।
