न लाल किला न ताज महल; ये मस्जिद थी भारत में मुगलों की पहली इमारत, इस बादशाह ने रखवाई इसकी नींव

भारत के इतिहास में मुगल दौर की शुरुआत के साथ एक भव्य इमारत का निर्माण हुआ, जिसने स्थापत्य कला की नई पहचान गढ़ी। ऐसा कहा जाता है कि इस धरोहर ने आने वाले समय में कई महान निर्माणों की प्रेरणा बनकर इतिहास के पन्नों में अपनी जगह बनाई। ऐसे में आइए जानें इस इमारत के बारे में।

Mughal Empire First Monument: भारत का इतिहास केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं, बल्कि निर्माण और सृजन का भी अनोखा सफर है। अलग-अलग शासकों के आने से यहां वास्तुकला की अनेक धाराएं विकसित हुईं। दिल्ली सल्तनत के समय शुरू हुई इमारतों की परंपरा मुगलों के दौर में और निखरी, जहां संगमरमर, लाल पत्थर और सूक्ष्म नक्काशी का अनोखा संगम दिखाई देता है। आगे चलकर मराठों ने किलों और मंदिरों में अपनी पहचान छोड़ी, जबकि ब्रिटिश काल ने आधुनिकता और इंडो-यूरोपीय शैली का मिश्रण पेश किया। इन सभी कालखंडों की धरोहरें आज भी हमारे सामने खड़ी हैं, कभी इतिहास की गवाही बनकर, तो कभी कला के महान उदाहरण के रूप में। यही विविधता भारत को अद्वितीय बनाती है और दुनिया भर के लोगों को अपने अतीत से जुड़ने के लिए यहां खींच लाती है। ऐसे में आज हम आपको भारत में मुगलों की पहली इमारत के बारे में बताएंगे।

First Mughal Building in India

भारत में मुगलों की पहली इमारत

मुगल बादशाह बाबर (फोटो: विकिपीडिया)

किसने रखी मुगल सत्ता की नींव?

1526 में बाबर ने भारत में मुगल सत्ता की नींव रखी। पहली पानीपत की लड़ाई में उसने दिल्ली सल्तनत के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को पराजित किया। इस युद्ध में बाबर ने तुलुगमा और अरबा जैसी युद्ध-रणनीतियों का उपयोग किया, जिनकी मदद से उसकी लगभग 12 हजार सैनिकों की सेना ने लोदी की करीब एक लाख सैनिकों वाली फौज पर निर्णायक जीत हासिल की। इब्राहिम लोदी के मारे जाने के बाद बाबर ने सत्ता संभाली और आगरा को अपनी राजधानी घोषित किया।

End of Feed