Last Road of India: भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर एक अनोखा मार्ग स्थित है, जो किसी आम सड़क की तरह नहीं है। यह रास्ता धीरे-धीरे समुद्र की ओर बढ़ता है और अचानक समाप्त हो जाता है, सामने केवल अनंत और विकराल सागर दिखाई देती है। दोनों ओर फैली समुद्र की लहरों के बीच यह मार्ग अपनी शांत और सुनसान खूबसूरती के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताएं इसे और भी विशेष बनाती हैं, क्योंकि माना जाता है कि यह क्षेत्र प्राचीन समय में महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। 1960 के दशक में आए प्रकोप ने इसे पूरी तरह बदल दिया, फिर भी यह सड़क आज भी यात्रियों, साहसिक प्रेमियों और फोटोग्राफरों को अपनी ओर आकर्षित करती है। दूर-दूर तक फैला समुद्री दृश्य इसे अविस्मरणीय अनुभव बनाता है। ऐसे में आइए जानें भारत की आखिरी सड़क या Last Road of India के बारे में।
भारत की आखिरी सड़क
भारत की आखिरी सड़क (फोटो: iStock)
भारत की आखिरी सड़क
"भारत की आखिरी सड़क" (Last Road of India) उस मार्ग के लिए प्रसिद्ध है जो धनुषकोडी (Dhanushkodi) तक जाती है, जो तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी छोर पर, रामनाथपुरम जिले में स्थित एक तटीय नगर है। यह सड़क अरिचल मुनई तक पहुंचती है और भारतीय मुख्य भूमि पर पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) से पहले का अंतिम सुलभ बिंदु है। यहां से श्रीलंका समुद्र पार लगभग 18-20 किलोमीटर दूर है, जिसे यहां से देखा भी जा सकता है।
धनुषकोडी के नाम का अर्थ
धार्मिक दृष्टि से भी यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि भगवान राम ने यहीं से लंका जाने के लिए रामसेतु (Adam’s Bridge) का निर्माण आरंभ किया था। आज रामेश्वरम से इस मार्ग पर बाइक या कार से आसानी से यात्रा की जा सकती है। सड़क सीधी समुद्र की ओर बढ़ती है, जैसे किसी फिल्म के दृश्य में हो। धनुषकोडी का अर्थ है "धनुष का अंत"। धनुष यानी धनुष और कोडी का मतलब अंत, जो इस किंवदंती से जुड़ा हुआ है।
1964 में क्या हुआ था? (फोटो: iStock)
1964 में क्या हुआ था?
1964 से पहले, धनुषकोडी एक छोटा लेकिन जीवंत शहर था जिसमें एक रेलवे स्टेशन, डाकघर और बंदरगाह सुविधाएं थीं। 1964 के चक्रवात, जिसे रामेश्वरम चक्रवात भी कहा जाता है, ने इस क्षेत्र को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था और धनुषकोडी तक जाने वाली रेलवे लाइन बंद कर दी गई थी। आज, राष्ट्रीय राजमार्ग 87 का विस्तार रामेश्वरम को धनुषकोडी से जोड़ता है, जो अरिचल मुनई पर समाप्त होता है। यह अंतिम खंड एक ओर बंगाल की खाड़ी और दूसरी ओर हिंद महासागर से घिरा है, जो इसे एक अनोखा तटीय मार्ग बनाता है।
रामेश्वरम से धनुषकोडी
धनुषकोडी तक रामेश्वरम से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है, जो लगभग 20 किलोमीटर दूर है। यह सड़क निजी वाहनों के लिए खुली है और सार्वजनिक परिवहन के विकल्प भी उपलब्ध हैं। यह क्षेत्र अपने मनोरम समुद्री दृश्यों और भारत-श्रीलंका समुद्री सीमा से निकटता के कारण पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। भारत सरकार के आधिकारिक पर्यटन अभियानों ने भी इस सड़क के हवाई दृश्यों को उजागर किया है और इसे "भारत की अंतिम सड़क" कहा है।
