PM Narendra Modi Gifts Melody Toffee: मेलोडी खाओ खुद जान जाओ… 90 के दशक के लोग शायद ही ये टैगलाइन न सुने हों। मार्केट में टॉफी की कोई कमी नहीं है, लेकिन बुधवार को कुछ ऐसा हुआ जिसने पार्ले मेलोडी टॉफी को देशभर में चर्चा का विषय बना दिया। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की।
पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी की गिफ्ट की मेलोडी टॉफी। AI IMAGE
पीएम मेलोनी ने एक्स पर इस वीडियो को पोस्ट कर कहा, “प्रधानमंत्री मोदी मेरे लिए गिफ्ट में बहुत-बहुत अच्छी टॉफी लेकर आए- मेलोडी। गिफ्ट के लिए थैंक्यू” इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन (10 करोड़) से ज्यादा बार देखा गया। वहीं एक्स पर भी इसे 74 लाख से ज्यादा व्यू मिले।
'मेलोडी खाओ खुन जान जाओ' की कहानी
वीडियो वायरल होने के बाद इस टॉफी की चर्चा देशभर में हो रही है। इसी कड़ी में आइए जानते हैं कि आखिर 'मेलोडी खाओ खुन जान जाओ'ये टैगलाइन आखिर किसने लिखी है? इस सवाल का जवाब जानने से पहले आइए जानते हैं कि आखिर मेलोडी टॉफी कंपनी का क्या इतिहास है। मेलोडी टॉफी को बनाने वाली कंपनी का नाम पार्ले प्रोडक्ट्स (Parle Products) है। रिटेल मार्केट में मेलोडी टॉफी को 1 रुपए में बेचा जा रहा है।
पार्ले कंपनी की शुरुआत साल 1929 में मुंबई के 'विले पार्ले' इलाके में चौहान परिवार ने की थी। पहले यह कंपनी केवल छोटी-मोटी कैंडीज बनाती थी, जिसके बाद इसने पार्ले-जी (Parle-G) जैसे मशहूर बिस्कुट बनाने शुरू किए। साल 1983 में कंपनी ने बाजार में एक नई टॉफी उतारी, जिसे नाम दिया गया, मेलोडी।
उस दौरान इसकी ब्रांडिंग की पूरी जिम्मेदारी मशहूर मार्केटिंग एजेंसी 'एवरेस्ट' के कंधों पर थी। एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस प्रोडक्ट को एक ऐसी बेहतरीन चॉकलेट के रूप में कैसे पेश किया जाए, जो बच्चों के दिलों पर राज कर सके। इस विज्ञापन अभियान (कैम्पेन) की क्रिएटिव टीम की कमान हरेश मूरजानी संभाल रहे थे, और रणनीति पर काम करते हुए उन्हें एक कमाल का आइडिया आया।
उनका विचार था कि विज्ञापन में ऐसे किरदारों या मशहूर चेहरों को दिखाया जाए, जिन्हें बच्चे बेहद पसंद करते हैं या जिनके जैसा वो बनना चाहते हैं। ये किरदार मेलोडी को लेकर एक सवाल पूछेंगे, और उसका जवाब एक बच्चा देगा। इसी अनोखे कॉन्सेप्ट को ध्यान में रखते हुए कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी ने विज्ञापन की लाइनें (स्क्रिप्ट) लिखीं, जो पारले कंपनी के मैनेजमेंट को पहली ही बार में बेहद पसंद आ गईं।
जब टीवी पर छा गई टॉफी
मेलोडी के टीवी विज्ञापन भी काफी लोकप्रिय हुए। किसी विज्ञापन में कोच पूछता है, मेलोडी इतनी चॉकलेटी कैसे है? इसके अलावा, टीचर यही सवाल करती दिखती थीं। हर बार जवाब एक ही होता था," मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।" इन विज्ञापनों ने मेलोडी को काफी पॉपुलर बना दिया।
क्यों है ये टॉफी खास?
मेलोडी टॉफी के बाहर की परत कड़क और कैरेमल (मलाईदार टॉफी) स्वाद वाली होती है। जैसे ही आप इसे चबाते हैं, इसके अंदर से गाढ़ी चॉकलेट क्रीम निकलती है। यही वजह है कि इसके एक ही टॉफी में दो अलग-अलग स्वाद और मजा मिलता है।
