Types of Galaxies in the Universe: ब्रह्मांड (What is Universe?) की बात करें तो, यह वो विशाल अस्तित्व है जिसमें समस्त अंतरिक्ष, पदार्थ, ऊर्जा और समय समाहित हैं। इसमें हम स्वयं भी शामिल हैं। पृथ्वी, उसका उपग्रह चंद्रमा, अन्य ग्रह और उनके अनेक चंद्रमा सभी इसी ब्रह्मांड का हिस्सा हैं। क्षुद्रग्रह (Asteroid) और धूमकेतु (Comet) भी इन ग्रहों के साथ सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सूर्य हमारी आकाशगंगा के अरबों तारों में से एक है। अधिकांश तारों के चारों ओर अपने-अपने ग्रह मौजूद होते हैं, जिन्हें बाह्यग्रह (Outer Planets) या एक्सोप्लैनेट कहा जाता है। हमारी आकाशगंगा उन असंख्य आकाशगंगाओं में से एक है जो दर्शनीय ब्रह्मांड में फैली हुई हैं। माना जाता है कि लगभग हर आकाशगंगा के केंद्र में एक महाविशाल ब्लैक होल (Black Hole) स्थित होता है। तारों, ग्रहों और उन सभी वस्तुओं को, जिन्हें खगोलविद अभी तक देख नहीं पाए हैं, ब्रह्मांड का हिस्सा माना जाता है। सरल शब्दों में कहें तो ब्रह्मांड ही सब कुछ है। वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड की आयु लगभग 13.8 अरब वर्ष है। यह अनुमान सबसे पुराने तारों की उम्र और ब्रह्मांड के विस्तार की गति को मापकर लगाया गया है। आकाशगंगाओं से आने वाले प्रकाश में डॉप्लर विस्थापन का अध्ययन करके भी यह सिद्ध हुआ है कि लगभग सभी आकाशगंगाएं हमसे और एक-दूसरे से दूर जा रही हैं।
ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं के प्रकार
ब्रह्मांड में कुल कितनी आकाशगंगाएं हैं?
ब्रह्मांड में कुल कितनी आकाशगंगाएं हैं
ब्रह्मांड में कुल आकाशगंगाओं की सही संख्या ज्ञात नहीं है, लेकिन खगोलशास्त्रियों का अनुमान है कि अवलोकन योग्य ब्रह्मांड में लगभग 100 अरब से 2 ट्रिलियन तक आकाशगंगाएं मौजूद हो सकती हैं। नासा (NASA) के हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, इनकी संख्या आम तौर पर 100 से 200 अरब के बीच मानी जाती है। इसके अलावा, जैसे-जैसे हम और दूरस्थ तथा धुंधली आकाशगंगाओं का पता लगाते हैं, यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।
किसने की अन्य आकाशगंगाओं की खोज?
1920 के दशक में खगोलशास्त्री एडविन हबल ने यह ऐतिहासिक प्रमाण दिया कि हमारी आकाशगंगा, यानी मिल्की वे, ही ब्रह्मांड की अकेली संरचना नहीं है। उनकी खोज ने यह स्पष्ट कर दिया कि ब्रह्मांड में असंख्य अन्य गैलेक्सियां भी मौजूद हैं। इस खोज ने मानवता की ब्रह्मांड को देखने की दृष्टि को पूरी तरह बदल दिया। गैलेक्सियां अलग-अलग रूपों में दिखाई देती हैं। ये गैलेक्सियां आपस में मिलकर विशाल समूह और धागेनुमा संरचनाएं बनाती हैं, जो मिलकर ब्रह्मांड का नक्शा तैयार करती हैं।
गैलेक्सियों का विकास निरंतर चलता रहता है। वे आपसी टक्करों, तारों के जन्म और मृत्यु जैसी घटनाओं से बदलती रहती हैं। इन्हें समझना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये डार्क मैटर, ब्लैक होल और ब्रह्मांड के विस्तार के रहस्यों को उजागर करने में मदद करती हैं। अनुमानों के अनुसार, ब्रह्मांड में खरबों गैलेक्सियां मौजूद हैं। हर गैलेक्सी अपने भीतर तारों, गैस, धूल और डार्क मैटर का एक अनोखा संसार समेटे होती है। यही विविधता खगोल विज्ञान को और भी रोचक बनाती है तथा हमें ब्रह्मांड के विशाल आकार और जटिलता को समझने में सहायता करती है। हबल ने शक्तिशाली दूरबीनों की मदद से यह दिखाया कि जिन्हें पहले "स्पाइरल नेबुला" कहा जाता था, वे वास्तव में हमारी आकाशगंगा से बहुत दूर स्थित स्वतंत्र गैलेक्सियां हैं। इससे यह धारणा टूट गई कि मिल्की वे ही पूरा ब्रह्मांड है, और मानवता ने पहली बार ब्रह्मांड की असली विशालता को पहचाना।
ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं के प्रकार
गैलेक्सियां कितने प्रकार की हैं?
ब्रह्मांड में गैलेक्सियां मुख्यतः तीन रूपों में पाई जाती हैं, सर्पिल (Spiral), अंडाकार (Elliptical) और अनियमित (Irregular)। हमारी अपनी गैलेक्सी, मिल्की वे, एक सर्पिल गैलेक्सी है, जिसमें गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के प्रभाव से बंधे लगभग 200 अरब तारे मौजूद हैं। अन्य गैलेक्सियां कभी गोलाकार, कभी अंडाकार और कभी बिना किसी निश्चित आकार की हो सकती हैं। किसी गैलेक्सी का स्वरूप उसकी आंतरिक शक्तियों, तारों के निर्माण की प्रक्रिया और पड़ोसी गैलेक्सियों के साथ होने वाली परस्पर क्रियाओं से निर्धारित होता है।
प्रारंभिक समय में गैलेक्सियों को केवल रात के आकाश में चमकते धब्बों के रूप में देखा जाता था। लेकिन हबल स्पेस टेलीस्कोप ने इस धारणा को बदल दिया। जब टेलीस्कोप ने आकाश के खाली दिखने वाले हिस्सों को देखा, तो वहाँ हजारों धुंधली गैलेक्सियां दिखाई दीं। इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि दृश्य ब्रह्मांड में लगभग 100 अरब गैलेक्सियां मौजूद हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि यह संख्या 200 अरब से भी अधिक हो सकती है, क्योंकि आधुनिक दूरबीनें अब और भी धुंधली तथा दूर स्थित गैलेक्सियों का पता लगाने में सक्षम हैं।
गैलेक्सियां ब्रह्मांड में समान रूप से फैली हुई नहीं हैं। वे आपस में मिलकर क्लस्टर (समूह), सुपरक्लस्टर (महासमूह) और कॉस्मिक फिलामेंट जैसी संरचनाएं बनाती हैं। इन संरचनाओं के बीच विशाल खाली क्षेत्र पाए जाते हैं। यह असमान वितरण खगोलविदों को ब्रह्मांड के विस्तार का मॉडल तैयार करने में मदद करता है। साथ ही, इससे यह समझने में भी सहायता मिलती है कि ब्रह्मांड के विकास में डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की क्या भूमिका है।
