वैज्ञानिकों की चेतावनी; अरुणाचल में खंगरी ग्लेशियर के तेजी से पिघलने से हिमालयी क्षेत्र में बड़े संकट के संकेत, लाखों जीवन पर खतरा

अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में स्थित खांगरी ग्लेशियर को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ा खतरा जताया है। हालिया अध्ययन में ग्लेशियर के तेजी से पिघलने और एक खतरनाक ग्लेशियल झील बनने के संकेत मिले हैं, जिससे भविष्य में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पूर्वी हिमालय के ग्लेशियर लगातार अस्थिर होते जा रहे हैं।

Khangeri Glacier Melting: अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में स्थित खांगरी ग्लेशियर को लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। हाल ही में किए गए अध्ययन में ग्लेशियर के तेजी से पिघलने, अस्थिर भू-भाग बनने और एक संभावित खतरनाक ग्लेशियल झील के उभरने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह झील भविष्य में मगो चू बेसिन (Mago Chu Basin) के निचले इलाकों के लिए बाढ़ का बड़ा खतरा बन सकती है। यह जानकारी सोमवार को अधिकारियों द्वारा साझा की गई। अध्ययन के निष्कर्ष खांगरी ग्लेशियर पर आयोजित पांचवें वैज्ञानिक अभियान के दौरान सामने आए। इस अभियान को सेंटर फॉर अर्थ साइंसेज एंड हिमालयन स्टडीज (Centre for Earth Sciences and Himalayan Studies, CESHS) ने नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (National Centre for Polar and Ocean Research) और नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (North Eastern Regional Institute of Science and Technology) के सहयोग से पूरा किया।

Khangri Glacier Melting

खांगरी ग्लेशियर पर मंडराया खतरा

खंगरी ग्लेशियर का तेजी से पिघलना

CESHS के निदेशक ने दी यह जानकारी

पूर्वी हिमालय में ग्लेशियरों की स्थिति और जलवायु से जुड़े खतरों का अध्ययन करने के लक्ष्य से वैज्ञानिक अभियान 4 मई को ट्रांसबाउंड्री मगो चू बेसिन क्षेत्र में शुरू किया गया था। यह इलाका ब्रह्मपुत्र बेसिन प्रणाली के प्रमुख उद्गम क्षेत्रों में शामिल माना जाता है। अभियान के दौरान वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर की स्थिति, क्रायोस्फीयर मॉनिटरिंग (Cryosphere Monitoring) और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया। सेंटर फॉर अर्थ साइंसेज एंड हिमालयन स्टडीज (CESHS) के निदेशक तागे ताना (Tage Tana) ने बताया कि खांगरी ग्लेशियर के जमीनी सर्वेक्षण में भू-आकृतिक बदलाव (Geomorphological Changes) बेहद चिंताजनक पाए गए। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती जलवायु अस्थिरता और उसके गंभीर प्रभावों की ओर संकेत करते हैं।

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