कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ पहलवानों (Wrestlers) का धरना जारी है. इस मामले में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने खुद पहलवानों से मुलाकात की। देर रात तक खेल मंत्री और खिलाड़ियों के बीच बैठक हुई। तकरीबन 4 घंटे तक ये बैठक चली। मामले पर सरकार ने पहलवानों का पक्ष सुना। बजरंग पूनिया (Bajrang Punia), विनेश फोगाट (Vinesh Phogat), साक्षी मलिक (Sakshi Malik) इस बैठक में शामिल रहे। सरकार ने आश्वासन दिया है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो कड़ा एक्शन लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक बृजभूषण शरण सिंह पर खेल मंत्रालय की तरफ से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है।
खेल मंत्री से मुलाकात के बाद लौटते हुए पहलवान
खिलाड़ियों की मांग
आरोप काफी गंभीर हैं जिसकी वजह से कुश्ती संघ बैकफुट पर है। 22 जनवरी को इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। जिसमें बृजभूषण शरण सिंह इस्तीफा दे सकते हैं। कहा जा रहा है कि खेल मंत्री से उनकी बात हुई है और उन्होंने वहां अपना पक्ष रखा है। लेकिन रेसलर्स ये मांग कर रहे हैं कि तत्काल कुश्ती संघ के अध्यक्ष को हटाया जाए, और जब तक हटाया नहीं जाएगा, तब तक धरना चलता रहेगा। प्रदर्शन कर रहे पहलवान सिर्फ कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के इस्तीफे से मानने वाले नहीं हैं। बजरंग पुनिया ने कहा कि ना सिर्फ कुश्ती संघ के अध्यक्ष को हटाया जाए, बल्कि फेडरेशन को ही भंग किया जाए। विनेश फोगाट ने कहा कि यही फेडरेशन रहेगा तो कुश्ती संघ के अध्यक्ष के लोग बने रहेंगे और फिर रेसलर्स को परेशान करेंगे। पहलवानों ने कहा कि अगर 20 जनवरी यानी कल तक फेडरेशन को भंग नहीं किया जाता तो फेडरेशन के खिलाफ FIR करवाएंगे।देशभर में छिड़ी बहस
खेल मंत्री अनुराग ठाकुर का आश्वासन है कि आरोप सही पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सच्चा कौन और झूठा कौन ये बहस देश भर में चल रही है। देश को मेडल दिलानेवाले रेसलर सड़क पर बैठे हैं कुश्ती संघ के खिलाफ जंग छेड़ दी है। बड़ी बड़ी चोट सहनेवाले खिलाड़ी कैमरे पर रो रहे हैं और उनके आंसू देखकर मोदी सरकार एक्शन में आ गई है। पिछले दो दिन से दिल्ली में धरने पर बैठे ये कोई मामूली खिलाड़ी नहीं हैं कोई ओलंपिक मेडलिस्ट है, तो कोई कॉमनवेल्थ गेम्स का चैंपियन है, तो कोई एशियन गेम्स का चैंपियन है। दुनिया भर में इन खिलाड़ियों का नाम है। लेकिन यहां स्थिति ये है कि इन खिलाड़ियों के लिए अलग ही दंगल चल रहा है। उन्हें धरना देना पड़ रहा है।
