Women Reservation Bill: महिला आरक्षण के मसले पर विपक्ष की मांग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विरोधी दलों को घेरा है। उन्होंने कहा कि कुछ दलों के लिए महिला सशक्तीकरण सियासी एजेंडा हो सकता है। यह कुछ दलों के लिए चुनाव जीतने का हथियार हो सकता है, मगर भाजपा और नेता नरेंद्र मोदी के लिए यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि मान्यता का मुद्दा है। यह उनके लिए उनके स्वभाव और संस्कृति का मुद्दा है।
कांग्रेस के राहुल गांधी, गृह मंत्री अमित शाह और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी। (फाइल)
केरल के वायनाड से कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी और बाकी विपक्षी दलों की ओर से इसे तुरंत लागू करने की मांग के जवाब में वह आगे बोले- भारतीय चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित करने में डिलिमिटेशन कमीशन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करते हैं। चुनाव आयोग, बाकी संस्थाएं और सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी इसमें होते हैं।
बकौल शाह, "अब एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करनी है तो वह कौन तय करेगा? ये (विपक्षी दल) कह रहे हैं तुरंत करो, मतलब हम करें और वायनाड (राहुल का संसदीय क्षेत्र) रिजर्व हो गया तो क्या करोगे...तब कहेंगे राजनीतिक कारणों से कर दिया।"
गांधी पर उन्होंने आगे कहा- देश को सेक्रेटरी नहीं सरकार और यह संसद चलाती है। राहुल गांधी सरकार में ओबीसी मंत्रियों की संख्या देख लें। भाजपा के ओबीसी सांसदों और विधायकों की संख्या देख लें। महिला आरक्षण बिल लाने का यह पांचवां प्रयास है। आखिर क्या कारण रहा कि पहले चार बार जब इस बिल को लाने की कोशिश की गई तब यह पास नहीं हो पाया?
यही नहीं, उन्होंने एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी को भी निशाने पर लिया और दो टूक पूछा- हैदराबाद रिज़र्व हो गया तो ओवैसी साहब क्या कहेंगे? ऐसे में यह अच्छा होगा कि डिलिमिटेशन कमीशन सभी राज्यों में जाकर ओपन हियरिंग के बाद पारदर्शी तरीके से यह तय करे कि कौन सी सीटें रिज़र्व की जाएं।
