'महिला को प्रेग्नेंसी पूरा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता', गर्भपात मामले पर SC की बड़ी टिप्पणी

हाई कोर्ट ने महिला को अपना बच्चा एडाप्शन में देने का विकल्प भी दिया था। महिलाओं की प्रजनन स्वायत्तता पर जोर देते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना एवं उज्जवल भुयन की पीठ ने कहा कि 'महिला यदि किन्हीं वजहों से अपना गर्भधारण पूरा नहीं करना चाहती तो अदालत इसे जारी रखने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।'

SC on Pregnancy : महिलाओं के गर्भपात मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम टिप्पणी की। गर्भपात से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भधारण (प्रेग्नेंसी) पूरा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि बच्चा पैदा करना है या नहीं, यह निर्णय लेने का अधिकार अजन्मे बच्चे के अधिकार से कहीं ज्यादा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने आदेश में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) की इजाजत पर रोक लगा दी थी और महिला को अपना गर्भपात पूरा करने का निर्देश दिया था। गर्भपात कराने का यह मामला महाराष्ट्र का है।

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गर्भपात मामले में कोर्ट की बड़ी टिप्पणी।

'कोर्ट गर्भधारण जारी रखने के लिए बाध्य नहीं कर सकता'

हाई कोर्ट ने महिला को अपना बच्चा एडाप्शन में देने का विकल्प भी दिया था। महिलाओं की प्रजनन स्वायत्तता पर जोर देते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना एवं उज्जवल भुयन की पीठ ने कहा कि 'महिला यदि किन्हीं वजहों से अपना गर्भधारण पूरा नहीं करना चाहती तो अदालत इसे जारी रखने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।'

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